शिमला : हिमाचल के सभी विभागों के लिए सरकार स्क्रैप पॉलिसी प्रदेश मंत्रिमंडल की अगली बैठक में लाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल विधानसभा के चल रहे बजट में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक केवल सिंह पठानिया की ओर से रखे सवाल के जवाब देते हुए यह ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पॉलिसी में सभी विभागों के लिए यूनिफार्म रूल लाएंगे। उन्होंने कहा कि इसको लेकर जो भी नीतिगत फैसला करेंगे, वह टाइम बाउंड होगा। उन्होंने कहा कि मैनें भी देखा है कई स्कूलों में बैंच-टेबल से कमरे भरे पड़े है। वहीं मेडिकल कॉलेजों में एक्यूपमेंट से दो-दो कमरे भरे है। इससे पूर्व लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इसी सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग में आने वाले समय पॉलिसी बनाएगा, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान ना हो और इसको लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पीडब्लयूडी में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाडिय़ों व अन्यों की नीलामी की जाती है। दरअसल विधायक केवल सिंह पठानिया ने सवाल पूछा था कि विभिन्न सरकारी कार्यालयों के कितने स्क्रैप स्टोर अथवा अन्य स्थानों पर खड़े है, जो निर्धारित स्क्रैप नीति के तहत उपयोग में नहीं जाए जा सकते। उन्होंने इसका विभागवार ब्यौरा मांगा और इन वाहनों के निस्तारण/नीलामी अथवा स्क्रैप नीति के क्रियान्वयन हेतू सरकार द्वारा उठाए जा रहे पगों का ब्यौरा मांगा। जिस पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने सूचना एकत्रित की जा रही है का सदन में जवाब दिया।
जमीन की जरूरत पड़ी तो विधायक अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विधायक त्रिलोक जम्वाल की ओर से प्रश्नकाल में उठाए सवाल के जवाब में कहा कि जल्द ही प्राथमिक पाठशाला कसोल के भवन निर्माण की ड्राइंग बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर निर्माण हेतु जमीन कम पडेगी, तो विधायक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन उपलब्धता में हस्तक्षेप करें। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में आपदा के कारण 1577 स्कूल प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला नैन गुजरा के लिए दो लाख हजार हजार और प्राथमिक पाठशाला कसोल चौबीस लाख की राशि आपदा से हुए नुकसान की एवज में मरम्मत एवं रखरखाव के लिए स्वीकृत व आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि कसोल विद्यालय के लिए 24 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी , लेकिन स्कूल की भूमि भारी बारिश के कारण बह गई थी। जबकि दान की गई भूमि भवन निर्माण हेतु पर्याप्त नहीं है।