Tuesday, October 06, 2026
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बाज़ार

Rupee Crashes: ईरान युद्ध का झटका: भारतीय रुपया धड़ाम! पहली बार 92 के पार, 9.7 लाख करोड़ रुपये का निवेशक धन डूबा

04 मार्च, 2026 06:28 PM

ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष के तेजी से बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण, सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजारों से निवेशकों की लगभग 9.7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई। इसी दौरान रुपया पहली बार प्रति डॉलर 92 के स्तर को पार कर गया।

बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया है, क्योंकि उन्हें डर है कि मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में युद्ध से तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक, भारत में मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ सकती है।

भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 55 पैसे गिरकर 92.03 पर आ गई, जो पहली बार 92 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। यह गिरावट जनवरी 2026 के अंत में दर्ज किए गए 91.99 और 92.02 के पिछले रिकॉर्ड निचले स्तरों से भी अधिक है।

साथ ही, शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई जिसने निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन सोमवार के 456.17 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 446.47 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जिससे लगभग 9.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

 

बाजार के मुख्य आंकड़े:
सेंसेक्स:
 1,710 अंक टूटकर 78,529 पर आ गया, जो पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।

निफ्टी 50: लगभग 477 अंक गिरकर 24,389 पर बंद हुआ, जो करीब सात महीनों में पहली बार 24,400 के स्तर से नीचे गया है।

युद्ध और तेल का प्रभाव
सप्ताहांत में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा सैन्य हमले शुरू करने के बाद बाजार की धारणा बिगड़ गई, जिससे पूरे तेल समृद्ध क्षेत्र में जवाबी हमले शुरू हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत से संघर्ष रुकने की संभावना कम है और चेतावनी दी कि यह युद्ध "चार से पांच सप्ताह" तक चल सकता है।

इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। ब्रेंट क्रूड उछलकर लगभग $82.53 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से टैंकरों की आवाजाही रुकने से तेल की कीमतों में यह उछाल आया है। भारत के लिए, जो अपने कच्चे तेल का लगभग 85% आयात करता है, यह उछाल मुद्रास्फीति और व्यापार घाटे के लिए सीधा खतरा है।

विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "भारत के नजरिए से असली चिंता मुद्रास्फीति और विकास पर इसके प्रभाव को लेकर है।" उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध रुपये को और कमजोर कर सकता है, व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है और कॉर्पोरेट आय को नुकसान पहुंचा सकता है।

हालांकि, विजयकुमार ने निवेशकों को घबराने की सलाह नहीं दी। उन्होंने कहा, "बाजार में चिंताओं के बीच भी ऊपर चढ़ने की अद्भुत क्षमता होती है। उच्च जोखिम क्षमता वाले लंबी अवधि के निवेशक सुधार (करेक्शन) के दौरान धीरे-धीरे गुणवत्तापूर्ण शेयर जमा कर सकते हैं।"

अन्य प्रभाव
बिकवाली:
 विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले सत्र में 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

प्रभावित शेयर: L&T, इंडिगो, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3% से 6% की गिरावट आई।

वैश्विक असर: यह उथल-पुथल केवल भारत तक सीमित नहीं थी; दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 12% से अधिक गिर गया, जो मध्य पूर्व संघर्ष के वैश्विक झटकों को दर्शाता है।

 

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