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बाज़ार

New Labour Code Impact: नए लेबर कोड से हिला बैंकिंग सेक्टर, HDFC सहित कई बैंकों को बड़ा झटका!

22 जनवरी, 2026 04:51 PM

देश में नए लेबर कोड लागू होने के बाद दिसंबर तिमाही (Q3) में कॉरपोरेट सेक्टर पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। प्रमुख आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है, वहीं बैंकिंग सेक्टर को भी इस बदलाव से बड़ा झटका लगा है। तिमाही नतीजों के मुताबिक, HDFC जैसे बड़े बैंकों सहित एक दर्जन से ज्यादा बैंकों, NBFCs और इंश्योरेंस कंपनियों पर कुल मिलाकर करीब 1,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, क्योंकि कंपनियों को नए श्रम नियमों के तहत कर्मचारियों से जुड़े लाभ और सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़ा है।


HDFC बैंक को सबसे बड़ा झटका
सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा है, इसके बाद NBFCs और इंश्योरेंस कंपनियों का नंबर आता है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC बैंक को सबसे बड़ा झटका लगा है। बैंक ने करीब 800 करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी है। HDFC बैंक के CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने एनालिस्ट कॉल में बताया कि कर्मचारियों की नौकरी की अवधि अलग-अलग संस्थानों में अलग होती है और यह अनुमान उपलब्ध सर्वोत्तम आंकड़ों और वैज्ञानिक गणना के आधार पर लगाया गया है।


ICICI, यस बैंक और मिड-साइज बैंकों पर भी असर
ICICI बैंक ने करीब 145 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जबकि यस बैंक ने लगभग 155 करोड़ रुपए के असर की बात कही है। मिड-साइज बैंकों पर भी दबाव दिखा है। फेडरल बैंक ने 20.8 करोड़ रुपए और RBL बैंक ने करीब 32 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च दर्ज किया है। ICICI बैंक के ग्रुप CFO अनिंद्या बनर्जी ने कहा कि मौजूदा स्थिति के आधार पर अतिरिक्त देनदारी का अनुमान लगाया गया है और आने वाले समय में नए नियमों के चलते रोजमर्रा के खर्च में कुछ बढ़ोतरी बनी रह सकती है।


नए लेबर कोड में क्या बदला?
नए लेबर कोड के तहत कुल सैलरी में बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ाना अनिवार्य किया गया है। इससे प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे खर्च बढ़ जाते हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ता है, जहां कर्मचारियों की संख्या ज्यादा और स्थायी है। बड़े शाखा नेटवर्क और फ्रंट-एंड स्टाफ वाले बैंकों व इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह बोझ आगे भी बना रह सकता है।


NBFCs और इंश्योरेंस कंपनियां भी प्रभावित
नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों पर भी नए लेबर कोड का असर पड़ा है, हालांकि यह बैंकों के मुकाबले कुछ कम रहा। HDB फाइनेंशियल सर्विसेज ने करीब 61 करोड़ रुपए, L&T फाइनेंस ने 29 करोड़ रुपए और टाटा कैपिटल ने लगभग 33 करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी है। वहीं, सरकारी बैंकों पर इसका असर अपेक्षाकृत सीमित रहा है, क्योंकि उनके कर्मचारियों की सैलरी और लाभ पहले से ही वेतन समझौतों के तहत तय होते हैं, जिनमें कई सुविधाएं पहले से शामिल हैं।

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