भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति में पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। केंद्रीय बैंक ने इस फैसले के पीछे बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों को प्रमुख कारण बताया।
यह निर्णय संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित किया गया। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “विकसित हो रहे मैक्रोइकॉनॉमिक और वित्तीय हालातों के विस्तृत आकलन के बाद MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही SDF रेट 5 प्रतिशत और MSF रेट तथा बैंक रेट 5.5 प्रतिशत पर बने रहेंगे।”
MPC की बैठक 6, 7 और 8 अप्रैल को आयोजित की गई थी, जिसमें आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों का आकलन किया गया।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह नीति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण।
गवर्नर ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ और कम महंगाई के साथ बेहतर स्थिति में थी। हालांकि मार्च में हालात बिगड़े, जब संघर्ष तेज हुआ।
इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और यह अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम है।
उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों और जरूरी संसाधनों की कमी के कारण वैश्विक ग्रोथ पर दबाव है, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ी है और तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा है।संघर्ष के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी असर पड़ा है। सुरक्षित निवेश (safe-haven) की मांग बढ़ने से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा है।
वहीं, धातु और सोने जैसी कमोडिटी कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई है और महंगाई व राजकोषीय चिंताओं के चलते बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई है।