देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इस समय बड़े संकट से जूझ रही है, जिसका सीधा असर देश की घरेलू उड़ान सेवाओं पर पड़ा है। एयरलाइन द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द किए जाने के कारण हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं और उन्हें री-शेड्यूलिंग और रिफंड जैसी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक इंडिगो के इस संकट से देश के 11 बड़े एयरपोर्ट पर 570 से अधिक उड़ानें रद्द हुई हैं। पिछले 4 दिनों में 2000 से ज्यादा विमान प्रभावित होने की खबर है, जिसके चलते हवाई किराए में 4 गुना तक की बढ़ोतरी भी देखी गई।
सरकार और DGCA एक्शन में
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मनमाने किराया वसूली पर रोक लगाते हुए फेयर कैप (किराया सीमा) लागू कर दिया है। DGCA भी हरकत में आ गया है। DGCA के निर्देशानुसार पायलटों के रोस्टर और विश्राम नियम (Rest Rule) से संबंधित अपने कुछ निर्देशों को फिलहाल वापस ले लिया है। DGCA ने सभी पायलट यूनियनों से अपील की है कि हवाई यात्रा दबाव के बीच वे सहयोग करें। मंत्रालय ने कदम उठाते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने गृह मंत्री अमित शाह को इंडिगो मामले की पूरी जानकारी दी, जिसके बाद DGCA ने यह एक्शन लिया।
CEO ने दिया बयान
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने बताया कि 5 दिसंबर को 1000 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सामान्य संचालन 10 से 15 दिसंबर तक बहाल हो जाएगा।
इन 11 एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा दिखा असर
देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि इंडिगो की उड़ानें बड़े पैमाने पर रद्द हुई हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस निश्चित रूप से चेक कर लें, क्योंकि कई एयरपोर्ट पर जानकारी को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।