देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ केरल कांग्रेस के एक पोस्ट को लेकर मचे बवाल के बीच राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उनके खिलाफ निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘चोरों के सरदार’ और ‘कमांडर इन थीफ’ जैसी टिप्पणियों से जुड़ा है। SC ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत में चल रही मानहानि के मुकदमे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब देने के लिए 4 सप्ताह का समय भी दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया, “4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया जाता है। इस बीच, ट्रायल कोर्ट के सामने की सभी कार्यवाहियों पर रोक रहेगी।”
क्या था बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला?
इससे पहले 8 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका में उन्होंने आपराधिक मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने की मांग की थी। इससे पहले भाजपा के एक कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि प्रधानमंत्री मोदी को 'चोरों का सरदार' कहना पूरी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं को चोर बताने जैसा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। इन दलीलों पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी एक पहचान योग्य वर्ग है और शिकायतकर्ता को मामला दर्ज कराने का अधिकार है या नहीं, यह ट्रायल के दौरान तय होगा।
राहुल गांधी की क्या दलीलें?
राहुल गांधी ने कोर्ट में अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने अपने बयान में भाजपा या किसी राजनीतिक दल का सीधे नाम नहीं लिया था। बता दें कि कानून के तहत आपराधिक मानहानि के लिए एक निश्चित और ‘पहचान योग्य वर्ग’ का होना अनिवार्य है।
CJI पर टिप्पणी कर घिरी कांग्रेस
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफा मांगने वाली टिप्पणी कर कांग्रेस घिर गई है। दरअसल CJI सूर्यकांत ने सोमवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि लॉ एंड ऑर्डर उनका विषय नहीं है। प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था, ‘डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका स्थान लेने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।'' इस टिप्पणी पर कड़ी आलोचना जताई गई।
हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया। वहीं जिम्मेदार व्यक्ति को भी निलंबित कर दिया गया। लेकिन भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। केंद्रीय मंत्री किरन रीजीजू ने एक बयान में कहा, ''मैंने पहले ही कहा था कि कांग्रेस पार्टी का अगला निशाना न्यायपालिका है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत की सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करना चाहती है। उन्होंने कहा, ''भारत विरोधी सभी गुट एकजुट हो रहे हैं। सभी देशभक्त भारतीय भी एक साथ आएंगे।''