केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत अब केवल अपनी जरूरतों के लिए विनिर्माण नहीं कर रहा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए उत्पाद तैयार कर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ की 12वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि भारत वैश्विक बाजार के लिए विनिर्माण कर सकता है और गुणवत्ता के दम पर दुनिया में अपनी पहचान बना सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ ने बदली विनिर्माण की सोच
पीयूष गोयल ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और सरकार लगातार सुधारों तथा ठोस कदमों के जरिए उस विश्वास को मजबूत करती है, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद आयात किए जाते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की नियति मानने से इनकार किया।
‘मेड इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ का टैग लगाएं और अपनी गुणवत्ता के लिए पहचाने जाएं। उन्होंने कहा कि अब यह दृष्टिकोण आकार लेता दिखाई दे रहा है और इसके समर्थन में कई आंकड़े उत्साहजनक तस्वीर पेश करते हैं।
एफडीआई प्रवाह में दर्ज हुई बढ़ोतरी
पीयूष गोयल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में अब तक का सबसे अधिक 94.53 अरब डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। वहीं, वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल एफडीआई प्रवाह 843 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ग्रीनफील्ड औद्योगिक शहरों का विकास
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत देशभर में ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य इन औद्योगिक केंद्रों के जरिए निवेश, उत्पादन और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से कम हुआ अनुपालन बोझ
गोयल ने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों ने कारोबारी नियमों को सरल बनाया है और अनुपालन का बोझ कम किया है। प्रमुख क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने निवेश और विनिर्माण के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने इस प्रक्रिया को और गति दी है।
पीएलआई योजनाओं से निवेश और निर्यात को बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश हुआ। इन योजनाओं के तहत 23.8 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन या बिक्री दर्ज की गई, जबकि 15.2 लाख करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। इन योजनाओं से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की बात भी उन्होंने कही।
कई प्रमुख क्षेत्रों को मिला लाभ
गोयल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को पीएलआई योजनाओं से काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में काम हुआ है।
ओएनडीसी से छोटे उद्यमों को मिला प्रोत्साहन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) छोटे उद्यमों को बड़ा प्रोत्साहन दे रहा है। उनके मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर किए जा चुके हैं। इससे छोटे कारोबारियों और उद्यमों को डिजिटल कॉमर्स के बड़े बाजार से जोड़ने में मदद मिली है।
आंकड़ों से आगे आत्मविश्वास की कहानी
पीयूष गोयल ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की असली कहानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह उस आत्मविश्वास की कहानी है, जो इस पहल ने स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों, निर्माताओं, नवोन्मेषकों, निर्यातकों और देश के लोगों में पैदा किया है। उन्होंने कहा कि अब यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत उत्पादन कर सकता है, नवाचार कर सकता है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा
गोयल ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की यात्रा जारी है और अब इसका लक्ष्य और बड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक विनिर्माण महाशक्ति बनाना इस यात्रा का अगला चरण है। उनके मुताबिक, यह लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत के विजन को भी मजबूत करेगा।