शिमला (हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार जारी है, जिसने राज्य में भारी तबाही मचाई है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HP SDMA) के अनुसार, 20 जून से अब तक मानसून संबंधी घटनाओं में 257 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा राज्य में मौसमी आपदा की गंभीरता को दर्शाता है।
मृत्यु का आंकड़ा और प्रभावित जिले
जिलेवार आंकड़ों से पता चलता है कि मंडी (26 मौतें), कांगड़ा (28 मौतें), और कुल्लू (11 मौतें) बारिश से जुड़ी आपदाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से रहे हैं। कुल मौतों में से 133 मौतें सीधे तौर पर बारिश से संबंधित घटनाओं जैसे भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, डूबने और बिजली के झटके लगने से हुई हैं, जबकि 124 अन्य मौतें सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज की गई हैं। शुक्रवार शाम को जारी समग्र रिपोर्ट में व्यापक विनाश की भयावह तस्वीर सामने आई है।
मानवीय क्षति और संपत्ति का नुकसान
चल रहे मानसून के मौसम के दौरान राज्य में 331 लोग घायल हुए हैं और 37 लोग अभी भी लापता हैं। भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से अकेले 16 मौतें हुई हैं, जबकि उफनती नदियों और नालों में डूबने से 27 लोगों की जान गई है। अन्य हताहतों में बिजली गिरने, आग लगने, सांप के काटने, बिजली के झटके और आकस्मिक गिरने के कारण हुई मौतें शामिल हैं। मानवीय नुकसान के अलावा, राज्य में संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है:
1. आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान: 1,028 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और 2,157 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 285 गौशालाएं और 699 दुकानें व कारखाने भी नष्ट हो गए हैं।
2. सार्वजनिक संपत्ति: सड़कों, बिजली लाइनों, जल योजनाओं और सरकारी संस्थानों सहित 2,14,403 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ है।
3. पशुधन: पशुधन को भी गंभीर नुकसान हुआ है, जिसमें 1,625 मवेशी और 25,700 से अधिक मुर्गी पालन के पक्षी बारिश में मारे गए हैं।
जिलेवार क्षति का आकलन और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव
एचपी एसडीएमए ने बताया कि वित्तीय क्षति के मामले में मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां 1,180 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है। इसके बाद कांगड़ा और कुल्लू जिले हैं।
सड़कें और सेवाएं प्रभावित:
1. मंडी: मंडी जिले में सर्वाधिक व्यवधान देखा गया है, जहां 203 सड़कें अवरुद्ध हैं और 458 ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित है।
2. कुल्लू: कुल्लू में 79 सड़कें बंद हैं, जिनमें जेड (खानाग) में NH-305 भी शामिल है, जो एक बड़े भूस्खलन के कारण अवरुद्ध है।
3. जल आपूर्ति: चंबा (24), कांगड़ा (41), और मंडी (44) में जल आपूर्ति योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
4. किन्नौर: किन्नौर में भारी बारिश के बाद NH-5 सहित छह सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
5. कुल्लू और लाहौल-स्पीति: अचानक आई बाढ़ और HT लाइन में खराबी के कारण इन जिलों में व्यापक बिजली कटौती हुई है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने लोगों से कमजोर हिस्सों से यात्रा करने से बचने और सुरक्षा सलाह का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति गंभीर बनी हुई है क्योंकि बारिश जारी रहने की उम्मीद है, और निवासियों से कमजोर रास्तों से यात्रा करने से बचने और सुरक्षा सलाह का पालन करने का आग्रह किया गया है।