धर्मशाला : केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए हिमाचल प्रदेश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए 121.90 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री Jayant Chaudhary ने राज्यसभा सांसद Indu Bala Goswami को संसद में यह जानकारी देते हुए बताया कि यह राशि बाल वाटिका (पहली कक्षा से पहले) से लेकर पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्कूलों में गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए दी गई है। उन्होंने बताया कि कुल आवंटित राशि में से 110.66 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की हिस्सेदारी होगी, जबकि 11.24 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। इस व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य मिलकर बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 10.35 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 11 करोड़ बच्चों को प्रतिदिन गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के क्रियान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है, जबकि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता और दिशा-निर्देश प्रदान करती है।
इस बीच केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री Shripad Yesso Naik ने भी राज्यसभा सांसद Indu Bala Goswami को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि PM-KUSUM Scheme के अंतर्गत किसान अपनी जमीन पर सोलर पावर प्लांट स्थापित कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत कोई भी किसान स्वयं या किसी डेवलपर के माध्यम से दो मेगावाट क्षमता तक का सोलर पावर प्लांट अपनी जमीन पर स्थापित कर सकता है। इससे किसानों को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि किसानों को इस योजना के प्रति जागरूक करने और उनकी तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित करता है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इस योजना का व्यापक रूप से लाभ उठाते हैं तो इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।