हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण घोषणा साझा की है। प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के तहत जल संरक्षण और किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से 'धान की सीधी बिजाई योजना' (Direct Seeded Rice - DSR) को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों को सरकार द्वारा ₹4,500 प्रति एकड़ की दर से वित्तीय सहायता (अनुदान) दी जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई योजना की मुख्य बातें और शर्तें निम्नलिखित हैं:
योजना की प्रमुख विशेषताएं और समय-सीमा
सभी जिलों में लागू (एक अपवाद के साथ): खरीफ 2026 में यह योजना महेंद्रगढ़ जिले को छोड़कर हरियाणा के सभी जिलों में प्रभावी रूप से लागू रहेगी।
₹4,500 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि: जो किसान पारंपरिक रूप से धान की रोपाई करने के बजाय आधुनिक 'सीधी बिजाई' तकनीक का चयन करेंगे, उन्हें ₹4,500 प्रति एकड़ का प्रत्यक्ष अनुदान दिया जाएगा।
पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य: योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को हरियाणा सरकार के आधिकारिक “मेरी फसल, मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
अंतिम तिथि (DeadLine): पोर्टल पर पंजीकरण करने की आखिरी तारीख 15 जून 2026 निर्धारित की गई है।
धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक के बड़े लाभ
पारंपरिक कद्दु (Puddling) विधि की तुलना में सीधी बिजाई तकनीक किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है:
भूजल की भारी बचत : इस विधि में खेत को शुरुआत में पानी से भरकर रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे बहुमूल्य भूजल (Groundwater) की भारी बचत होती है और जल स्तर सुधरता है।
कम मेहनत और कम लागत : इसमें नर्सरी (पनीरी) तैयार करने और फिर उसकी रोपाई करने का झंझट खत्म हो जाता है। इससे लेबर (मजदूरी) का खर्च बचता है और खेती की कुल लागत में बड़ी कमी आती है।
समय की बचत : सीधे बीज बोने से फसल तैयार होने के समय और किसानों की मेहनत दोनों की बचत होती है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के किसान भाइयों से अपील की है कि वे गिरते भूजल स्तर को सुधारने और अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए इस पर्यावरण-अनुकूल तकनीक को अपनाएं और 15 जून से पहले अपना पंजीकरण जरूर सुनिश्चित करें।