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राष्ट्रीय

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा- ‘भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान पर सभी को गर्व होना चाहिए’

12 मार्च, 2026 06:53 PM

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बुधवार को ध्वनिमत से खारिज होने के बाद गुरुवार को अध्यक्ष के आसन पर बैठे। उन्होंने कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर संकल्प आया और इस पर दो दिनों तक 12 घंटे से अधिक चर्चा हुई। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन के भीतर प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपने विचार व्यक्त कर सके और सभी को पर्याप्त अवसर मिले।

संसद में सभी के लिए नियम समान

ओम बिरला ने कहा कि भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान पर सभी को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, “सदन में सहमति और असहमति की एक महान परंपरा रही है। मैंने हमेशा कोशिश की है कि सदन में संतुलन बना रहे और सभी की आवाज सुनी जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी के लिए नियम समान हैं और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। ओम बिरला ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले नोटिस देना पड़ता है।स्पीकर ने स्पष्ट किया कि नियमों से परे जाकर किसी को बोलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता और सदन केवल प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चेयर के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे किसी सांसद का माइक बंद या चालू किया जा सके। सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी आती है।

संसद में संवैधानिक गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध 

ओम बिरला ने लोकसभा में कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और सदन की कार्यवाही हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है।

ओम बिरला ने कहा कि वे उन सभी सांसदों के आभारी हैं, जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद में संवैधानिक गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।विपक्ष के इस आरोप पर कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया, लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत चलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को सदन में बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

विपक्ष ने कई बार नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण कठिन फैसले लेने पड़े

ओम बिरला ने कहा कि संसद में कोई भी फोटो, दस्तावेज, उद्धरण या छपी हुई सामग्री सदन में पेश करने से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष ने कई बार इन नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें कठिन फैसले लेने पड़े।सांसदों के निलंबन को लेकर उठे सवालों पर ओम बिरला ने कहा कि वे किसी भी सदस्य को निलंबित करना नहीं चाहते, लेकिन कभी-कभी सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं।

जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है

उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे फैसले लेने में दुख होता है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आखिर निलंबन की नौबत क्यों आती है। जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।”

स्पीकर के पास सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की शक्ति 

उन्होंने बताया कि नियम 377 के तहत स्पीकर के पास सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की शक्ति होती है। विपक्ष की महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए स्पीकर ने कहा कि जब कुछ सांसद तख्तियां लेकर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़े, तब संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी।ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा सदन की गरिमा बढ़ाने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की कोशिश की है और आगे भी इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे।

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