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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय समाज के सामूहिक सद्भाव को बताया राष्ट्र के लिए प्रेरणा

07 फ़रवरी, 2026 07:53 PM

जगदलपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज यहां कहा कि जनजातीय समाज का मिल-जुलकर रहने का तरीका और प्रकृति के साथ सामंजस्य पूरे राष्ट्र के लिए एक सीख है। मां दंतेश्वरी की नगरी जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित 'बस्तर पंडुम 2026' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने जनजातीय अस्मिता, संस्कृति के संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन की शुरुआत "जय जोहार" और मां दंतेश्वरी को प्रणाम करते हुए की। उन्होंने कहा, "मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं, तो लगता है अपने घर आई हूं। यहां के लोगों से जो अपनापन मिलता है, वह मेरे लिए अनमोल उपहार है।" उन्होंने मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक हुए भव्य स्वागत और पांच हजार से अधिक सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम से अभिभूत हुईं।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती को अक्सर पिछड़ेपन के नजरिए से देखा जाता रहा, जबकि यहां अकूत प्राकृतिक संपदा और अथाह सांस्कृतिक विरासत है। "छत्तीसगढ़ सुंदर है, लगता है मां दंतेश्वरी ने इस भूमि को अपने हाथों से संवारा है। आदिवासी समाज अनमोल है, जो पुराना है वह मीठा है, और यहां की परंपराएं हमें जीवन का सार बताती हैं।"

उन्होंने जनजातीय समाज की सामूहिकता की मिसाल देते हुए कहा, "जनजाति समाज के लोग भोले-भाले हैं, लेकिन देश और समाज को यह सीखने की जरूरत है कि कैसे मिल-जुलकर रहा जाता है। यह समाज प्रकृति का शोषण नहीं करता, बल्कि उसके साथ तालमेल बिठाकर चलता है। यह दर्शन आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है।"

राष्ट्रपति ने राज्य में नक्सलवाद की चुनौती का जिक्र करते हुए कहा, "छत्तीसगढ़ वीरों की धरती है, जिन्होंने भारत मां की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। मैं उन सभी वीर सपूतों को प्रणाम करती हूं।" उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले लोगों से संविधान और लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया। "मुझे बताया गया है कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि वे संविधान और लोकतंत्र के प्रति भरोसा रखें। सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए उनका संपूर्ण पुनर्वास करेगी।"

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, "सबके लिए अच्छी शिक्षा बेहद जरूरी है। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय इस दिशा में एक सराहनीय पहल है। मैं राज्य की महिलाओं से विशेष अपील करती हूं कि वे हर हाल में बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। अच्छी शिक्षा से ही अच्छा भविष्य संभव हो सकता है।" उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं स्वयं ओडिशा के एक छोटे से गांव से आती हूं। शिक्षा और संवैधानिक प्रावधानों ने मुझे देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अवसर दिया। यही शक्ति हर नागरिक में है।"

राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की दो प्रमुख योजनाओं - प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम उत्कर्ष योजना - की प्रगति पर संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में समग्र विकास लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने छत्तीसगढ़ के तीन समाजसेवियों - बुधरी ताती, रामचंद्र और सुनीता - के पद्म पुरस्कार हेतु चयन की सराहना करते हुए कहा, "निस्वार्थ सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। इन लोगों ने समाज के लिए जो कुछ किया है, वह प्रेरणादायी है।"

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए बस्तर पंडुम के विस्तार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव के माध्यम से आदिवासियों की कला, संस्कृति, नृत्य, पहनावा, वाद्ययंत्र, पेय पदार्थ और व्यंजनों को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री साय ने कहा। "शुरुआत में बस्तर पंडुम में सात कलाएं शामिल थीं, जिन्हें बढ़ाकर 12 कर दिया गया है। बस्तर के 1885 ग्राम पंचायतों के 55,000 से अधिक लोगों ने इस महोत्सव के विभिन्न चरणों में हिस्सा लिया।"

संति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत प्रतिवेदन में राज्य सरकार की जनजातीय कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय कलाकारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक माध्यम बन गया है।

 राज्यपाल रामेन डेका ने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए राज्य सरकार को बधाई दी और कहा कि जनजातीय संस्कृति का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। कार्यक्रम में कोण्डागांव के कलाकारों द्वारा गौर नृत्य सहित विभिन्न पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राष्ट्रपति ने मंच पर आसीन होने से पहले प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और स्थानीय हस्तशिल्प, कला एवं औषधियों के विशेषज्ञों से बातचीत की।

 समारोह में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप,प्रदेश अध्यक्ष किरण देव विधायकगण, जनजातीय समुदाय के बुजुर्ग, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीयनागरिक उपस्थित रहे। यह महोत्सव बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। राष्ट्रपति के संबोधन ने न केवल जनजातीय गौरव को प्रतिध्वनित किया, बल्कि एक समावेशी और संतुलित विकास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दी गई।

 

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