सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 2023 से अब तक मऊ में तैनात रहे सभी पुलिस अधीक्षकों (एसपी) पर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश एक आपराधिक मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस के लापरवाह रवैये का संज्ञान लेते हुए दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई (16 नवंबर) से पहले राज्य के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से सत्यापित एक हलफनामा भी दायर करते हुए बताएं कि क्या कार्रवाई हुई है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 21 सितंबर को यह आदेश दिया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। जानकारी के अनुसार, सुनवाई में पीठ ने गौर किया कि वर्ष 2017 में दर्ज आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष के 54 गवाहों में से अब तक केवल दो से ही पूछताछ की गई है, जबकि मार्च 2023 में छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके थे। पीठ ने कहा, 'इससे हमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि अभियोजन पक्ष, जिसकी जिम्मेदारी गवाहों को पेश करने की है, तीन साल से अधिक समय तक अपने कर्तव्य में पूरी तरह से लापरवाह रहा है।'
पीठ ने कहा, ‘हम उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देते हैं कि वह मऊ जिले के उन पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करे, जिन्होंने 2023 से अब तक इस पद पर काम किया है। यह कार्रवाई दो सप्ताह के भीतर शुरू की जानी चाहिए।’ अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई (16 नवंबर) से पहले राज्य के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से सत्यापित एक हलफनामा दायर करें, जिसमें कार्रवाई का विवरण हो।
यह है मामला
याचिकाकर्ता ने बताया था कि उसके 14 साल के बेटे का 27 सितंबर, 2017 को अपहरण कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी आज तक न तो उनका बेटा मिला है, न ही उसके अवशेष मिले हैं। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई 2025 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें याचिका को इस आधार पर निस्तारित किया गया था कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।
हाईकोर्ट भी पिछले दिनों कई अफसरों पर सख्त हुआ
पिछले कुछ समय से हाईकोर्ट भी अलग अलग मामलों में यूपी के अधिकारियों पर सख्त नजर आया है। पिछले दिनों प्रदेश के डीजीपी को भी हाईकोर्ट में पेश होना पड़ा था। नोएडा डीएम और वहां के अन्य अफसरों पर हाईकोर्ट का रुख तो सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है।