नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधयेक लोकसभा में पारित नहीं होने को “लोकतंत्र की बड़ी जीत” बताया है। प्रियंका गांधी शनिवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और देश के संघीय ढांचे में बदलाव की “साजिश” कर रही थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया।
उन्होंने कहा, “यह संविधान की जीत है, देश की जीत है और विपक्ष की एकता की जीत है। सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरों पर यह साफ दिख रहा था कि उन्हें बड़ा झटका लगा है।” उन्होंने गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने संकेत दिया था कि यदि विपक्ष सहमत नहीं होगा तो वह कभी चुनाव नहीं जीत पाएगा। “इन बयानों से ही सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है”।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर एक ऐसा बिल पास करवाना चाहती थी, जिससे उसे परिसीमन में मनमानी करने की आजादी मिल जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष से समर्थन लेना और उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया में स्वतंत्रता हासिल करना। इस बहाने वह जातिगत जनगणना के आंकड़ों से भी बचना चाहती थी। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ बड़ा सवाल था। ऐसे में विपक्ष का समर्थन करना संभव नहीं था।”
कांग्रेस महासचिव ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की महिलाएं सब देख रही हैं। उन्होंने उन्नाव, हाथरस, महिला खिलाड़ियों के आंदोलन और मणिपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इन मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा, “आज वही सरकार संसद में महिलाओं की हितैषी बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं।” उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि जब सभी दल साथ आते हैं, तो सरकार को चुनौती दी जा सकती है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के पक्ष में हैं, बशर्ते इसे सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा इस दिन को ‘ब्लैक डे’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “सरकार के लिए झटका” है और ऐसा झटका जरूरी था। उन्होंने कहा, “देश की महिलाएं अब सिर्फ प्रचार और दिखावे से प्रभावित नहीं होंगी। वे वास्तविक मुद्दों को समझ रही हैं और सरकार से जवाब मांग रही हैं।”