बहादुरगढ़ : वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय बहादुरगढ़ एवं अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के साहित्य एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन का लोकतांत्रिक दृष्टिकोण-वर्तमान में प्रासंगिकता विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता बहादुरगढ़ शिक्षा सभा के प्रधान श्रीनिवास गुप्ता ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन और वंदे मातरम् गायन से हुआ। प्राचार्या डॉ. राजवंती शर्मा ने स्वागत भाषण दिया और महासचिव प्रो. बिपिन गुप्ता ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में कुलपति, कुलसचिव सहित अनेक प्रोफेसर, शिक्षाविद् और शोधार्थियों ने भाग लिया और 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार मधुकांत के चार बाल नाटकों और श्रीमती बृज बाला गुप्ता की पुस्तक का विमोचन किया गया।
पूर्व कुलपति डॉ. मदन मोहन गोयल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन का दृष्टिकोण लोकतंत्र का आधार बनेगा। उन्होंने सामाजिक उत्तरदायित्व, समावेशी विकास, एआई और साइबर अपराध पर चर्चा करते हुए विकसित भारत 2047 के लिए एक्शन ओरिएंटेड दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी के जीवन और शासन व्यवस्था के मूल में लोकतांत्रिक मूल्य, आर्थिक समरूपता और सामाजिक समानता सबसे प्रमुख रहे हैं।
उन्होंने आज से हजारों वर्ष पूर्व एक आदर्श और लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना की थी। महाराजा अग्रसेन ने अपने विशाल राज्य को 18 गणों (प्रशासनिक इकाइयों) में विभाजित किया था। इन सभी 18 गणों से एक-एक प्रतिनिधि चुनकर शासन परिषद का गठन किया गया था, जिससे सच्चे अर्थों में लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव पड़ी।
मुख्य वक्ता श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दिल्ली की प्रो. सपना बंसल ने महाराजा अग्रसेन की समानता, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर विचार रखे। साथ ही कहा कि महाराजा अग्रसेन के ये लोकतांत्रिक और समाजवादी विचार आज भी आधुनिक समाज, सहकारिता और भाईचारे के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत और डॉ. प्रमोद अग्रवाल (चेयरपर्सन, महाराजा अग्रसेन शोध पीठ पटियाला) ने भी उनके सिद्धांतों को राष्ट्रीय विकास के लिए प्रेरणादायी बताया। अग्रवाल वैश्य समाज (एवीएस) के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि संगठन समाज और युवा पीढ़ी को महाराजा अग्रसेन के आदर्शों से जोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी ने अग्रोहा में बसने वाले नए परिवार के लिए उन्होंने अनूठा नियम बनाया कि नगर का प्रत्येक परिवार नए परिवार को एक ईंट और एक रुपया देगा। ईंट से नया परिवार अपना घर बनाता था। एक-एक रुपए से वे अपना व्यापार शुरू करते थे। यह योजना आर्थिक स्वतंत्रता और पारस्परिकता का बड़ा उदाहरण थी।
एवीएस के कार्यकारी अध्यक्ष विनोद सिंगला ने भी संबोधित किया। एवीएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास गुप्ता ने कहा कि आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे से ही तनावमुक्त और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। संगोष्ठी में दो समानांतर सत्र हुए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रकाश खांडे ने की, जबकि द्वितीय सत्र ऑनलाइन हुआ, जिसकी अध्यक्षता डा. पवन कुमार गुप्ता ने की। अंत में रुद्राक्ष पौधरोपण किया गया। कार्यक्रम की संयोजिका एसोसिएट प्रो. डॉ. शालू शर्मा रहीं और मंच संचालन डॉ. मनजीत ने किया।
महाराजा अग्रसेन के विचारों पर पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। महाराजा अग्रसेन शोध पीठ, पटियाला में शोध करने वालों को 30,000 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति। कार्यक्रम के अंत में 10,000 रुपये छात्रवृत्ति की भी घोषणा की गई।
इस मौके पर एवीएस के कार्यकारी अध्यक्ष विनोद सिंगला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास गुप्ता, प्रदेश सचिव प्रेम बंसल, प्रदेश प्रभारी डा. राजेश गुप्ता, एवीएस साहित्य प्रकोष्ठ के रजनीश गुप्ता, बहादुरगढ़ विधानसभा अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल, कार्यकारी विधानसभा अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, डा. गायत्री बंसल, महामंत्री राजपाल गुप्ता समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।