Thursday, May 28, 2026
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मंगल से 1761 नमूनों की जांच कर 3943 रिपोर्ट भेज चुका है एपीएक्सएस, जानें कैसे काम करता है यह हाईटेक सेंसर

28 मई, 2026 01:28 PM

मंगल ग्रह की सतह पर लगातार काम कर रहा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) अब तक 1761 नमूनों का विश्लेषण कर 3943 परिणाम पृथ्वी तक भेज चुका है। यह उपकरण अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी रोवर पर लगाया गया है, जो पिछले कई सालों से लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों की जांच में जुटा है।

कनाडाई स्पेस एजेंसी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट कर एपीएक्सएस से जुड़े अपडेट साझा किए, एजेंसी के मुताबिक, एपीएक्सएस वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहा है कि मंगल ग्रह की सतह किन तत्वों से बनी है और क्या वहां कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।

अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर आकार में लगभग रूबिक क्यूब (3डी पजल) जैसा दिखता है। यह क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा हुआ है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के पास पहुंचता है, तब यह उपकरण उस नमूने के करीब जाकर उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली एनर्जी का अध्ययन कर वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एपीएक्सएस किसी नमूने में मौजूद सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व की पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने का विस्तृत विश्लेषण करने में इसे करीब दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच लगभग 10 मिनट में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि यह उपकरण मंगल ग्रह की सतह पर लगातार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी जुटा रहा है।

साल 2024 में एपीएक्सएस ने एक बड़ी खोज में अहम भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के एक चट्टान के ऊपर से गुजरने पर वह टूट गई थी, जिसके अंदर वैज्ञानिकों को शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हुए थे। माना जा रहा है कि इस खोज से मंगल के पुराने वातावरण और वहां मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि एपीएक्सएस दिन और रात दोनों समय लगातार काम कर सकता है। यह उपकरण एक थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जो एनर्जी पैदा करता है। इसी वजह से क्यूरियोसिटी रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह मंगल की कड़ाके की सर्दियों में भी सक्रिय रहता है।

1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह की सतह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। इस दौरान एपीएक्सएस ने हजारों वैज्ञानिक आंकड़े जुटाकर पृथ्वी तक पहुंचाए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जानकारियों से भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

कनाडा ने इस मिशन में अपनी भागीदारी मार्च 2029 तक बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में एपीएक्सएस से और भी महत्वपूर्ण खोजों की उम्मीद की जा रही है।

 

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