पाकिस्तान में बलूच नागरिकों, खासकर छात्रों और महिलाओं को सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने के मामलों की कड़ी निंदा की जा रही है। कई मानवाधिकार और छात्र संगठनों ने बुधवार को इसकी निंदा करते हुए पीड़ितों की तुरंत रिहाई की मांग की है।
बलूच छात्रों की गुमशुदगी
बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल (बीएससी) के पंजाब और इस्लामाबाद चैप्टर के कई छात्रों को हाल में जबरन गायब कर दिया गया है। संगठन के अनुसार, परिवारों को अब तक उनकी गिरफ्तारी या लोकेशन की कोई सही जानकारी नहीं दी गई है। बीएससी पंजाब ने कहा कि ईद-उल-अजहा के मौके पर जब पूरा देश खुशियां मना रहा है, तब गायब छात्रों के परिवार अनिश्चितता और दर्द में डूबे हुए हैं। संगठन ने इसे बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।
बलूच महिला हबीबा पीरजान फिर गायब
बलूचिस्तान के नजरआबाद तुंप की रहने वाली हबीबा पीरजान, जो फिलहाल कराची में रह रही थीं, को 25 मई को सुरक्षा बलों द्वारा उनके घर पर छापा मारकर कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया। बलूच वुमेन फोरम (BWF) ने बताया कि यह हबीबा के साथ दूसरी बार ऐसा हुआ है। मई 2022 में भी उन्हें उठाया गया था और कुछ दिनों बाद रिहा किया गया था। फोरम ने इसे बलूच महिलाओं के खिलाफ “दमन और सामूहिक सजा” की नीति बताया।
अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने हबीबा पीरजान की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की मांग की है। साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों से बलूचिस्तान और कराची में जबरन गायब करने की प्रथा तुरंत बंद करने की अपील की है।
बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर छापेमारी
सोमवार को सुरक्षाबलों ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में रातभर तलाशी अभियान चलाया। खुजदार जिले के डॉक्टर कॉलोनी में एक दुकानदार सैफ-उर-रहमान समेत कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन छापों में कई अन्य लोगों को भी उठाया गया, हालांकि उनकी पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जबरन गायब करने की घटनाएं बलूचिस्तान में आम होती जा रही हैं, जिससे पूरे समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।