पटियाला : पंजाब की सियासत में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। सार्वजनिक मंचों से भारतीय जनता पार्टी भले ही राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही हो, लेकिन अंदरखाने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच फिर से गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की चर्चाएं गर्म हैं।
सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन में सीट शेयरिंग के एक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है, जिसके तहत अकाली दल को 70 और भाजपा को 47 सीटें देने का प्रस्ताव है। हालांकि, केवल सीटों की संख्या तय होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौन सी सीट किसके खाते में जाएगी, यह सबसे बड़ा पेंच बना हुआ है। पुराने गठबंधन के दौर में भाजपा का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी सीटों तक सीमित था, जबकि अकाली दल ग्रामीण और सिख बहुल क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभाता था।
बदले हुए सियासी समीकरणों में दोनों दल अपनी मजबूत दावेदारी वाली सीटों पर समझौता कैसे करेंगे, यह एक गंभीर सवाल है। सीटों के अलावा सत्ता के नेतृत्व यानी मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक सीटें मिलने की स्थिति में अकाली दल अपने अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में आगे रखना चाहता है, जबकि भाजपा का एक खेमा चुनाव से पहले किसी को भी सीएम फेस घोषित करने के पक्ष में नहीं है।
इन राजनीतिक चर्चाओं को तब और अधिक बल मिला, जब दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल के बीच मुलाकात हुई। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से चुनावी गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वोट बैंक के गणित पर नजर डालें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पंजाब में करीब 18.56 प्रतिशत और अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों का संयुक्त वोट शेयर लगभग 32 प्रतिशत बैठता है। हालांकि, गठबंधन की स्थिति में वोट बैंक का एक-दूसरे को ट्रांसफर होना बड़ी चुनौती रहेगा।
गौरतलब है कि दोनों दल 1997, 2007 और 2012 में मिलकर सरकार बना चुके हैं, लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में यह दशकों पुराना गठबंधन टूट गया था। अब 2027 से पहले दोनों के बीच 'बड़ा भाई' बनने की होड़ और गठबंधन की वापसी पंजाब की राजनीति के केंद्र में आ गई है। इधऱ, इस बारे में खास खबर डॉट कॉम ने पंजाब के भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया से पक्ष जानने के लिए प्रयास किया। लेकिन, उनसे संपर्क नहीं हो सका।