धर्मशाला : 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के अंतर्गत जिला कांगड़ा के धर्मशाला में आयुष अधिकारियों एवं चिकित्सकों के लिए एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें जिले भर से आए लगभग 200 आयुष चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा आयुष विभाग की भूमिका को जमीनी स्तर पर सशक्त करना रहा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार सूद ने प्रस्तुति के माध्यम से जिले में चल रहे टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, उपलब्धियों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक अभियान है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक करोल और जिला आयुष अधिकारी डॉ. बृज नंदन शर्मा ने अपने संबोधन में विभागीय समन्वय, जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आयुष चिकित्सकों से अपील की कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूकता फैलाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान करने और उपचाराधीन मरीजों को सहयोग देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि 200 से अधिक प्रतिभागियों ने ‘निक्षय मित्र’ पहल से जुड़ते हुए टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया। इस पहल से न केवल मरीजों को सहयोग मिलेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी जाएगा। कार्यशाला में वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े विशेषज्ञों ने भी तकनीकी जानकारी साझा की और टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने निक्षय शपथ लेकर टीबी मुक्त जिला, हिमाचल और भारत के लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया। यह कार्यशाला टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय अभियान को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुई।