शिमला : भाजपा के वरिष्ठ नेता जयराम ठाकुर ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य को मंत्रिमंडल नहीं बल्कि एक ‘मित्र मंडली’ चला रही है। जयराम ठाकुर ने शिमला में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट में नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के बीच लिए जा रहे हैं, जिससे राज्य के संसाधनों पर सरकार के करीबियों का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार अस्थिरता और डर के माहौल में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद सत्तारूढ़ दल के भीतर आंतरिक कलह और अनिश्चितता खुद सरकार के भीतर विश्वास के गहरे संकट को दर्शाती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का अब तक का कार्यकाल ज्यादातर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पिछली भाजपा सरकार की आलोचना करने में ही बीता है। उन्होंने सुक्खू सरकार पर राज्य को वित्तीय संकट में धकेलने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के दो कार्यकालों के दौरान केंद्र ने राज्य को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके बावजूद, राज्य सरकार बार-बार केंद्र पर हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के साथ वास्तविक भेदभाव पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान हुआ था, जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सत्ता में थी।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, पिछली भाजपा सरकार ने ‘हिमकेयर’, ‘सहारा योजना’ और ‘जल जीवन मिशन’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्रीय सहायता का प्रभावी ढंग से उपयोग किया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार केंद्र से प्राप्त धन से कोई भी बड़ा विकास कार्य शुरू करने में विफल रही है। राज्य की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि पिछले साढे़ तीन वर्षों में अनुदान के तहत प्राप्त धन का उपयोग कैसे किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था की भी आलोचना की। उन्होंने सिरमौर जिले के शिलाई के एक मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति के बहाने लगभग 300 पेड़ काट दिए गए, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने ऊना जिले के पेखूबेला में सौर ऊर्जा परियोजना का भी जिक्र किया और इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे कुप्रबंधन का प्रतीक बताया। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कैबिनेट के भीतर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और उद्योगपतियों से अवैध वसूली की जा रही है, जिससे कई उद्योग हिमाचल प्रदेश से बाहर जाने पर विचार करने को मजबूर हैं।
राज्यसभा चुनाव के मुद्दे पर जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने उम्मीदवार न उतारने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था, जिससे कांग्रेस को सीट जीतने का स्पष्ट अवसर मिला। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि टिकट को लेकर हुए घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को उजागर कर दिया है। भाजपा नेता ने एक राज्य सभा उम्मीदवार के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें एक ‘साधारण कार्यकर्ता’ के रूप में पेश किया है, लेकिन उनके हलफनामे में कथित तौर पर 23 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति और कई सरकारी अनुबंधों में शामिल होना दिखाया गया है।