भारतीय रसोई में काले नमक को स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि जिस भी व्यंजन में काला नमक मिलाया जाता है, उसका स्वाद दोगुना हो जाता है। काला नमक सिर्फ स्वाद को बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि इसका सेवन शरीर को संतुलित करने में मदद करता है। यह शरीर की कई बीमारियों से निजात दिलाने में सहायता करता है, लेकिन इसके सेवन की सही मात्रा और तरीके के बारे में पता होना जरूरी है। आयुर्वेद में काले नमक (सौवर्चला लवण) को सामान्य नमक से काफी अलग माना जाता है। काले नमक में सफेद नमक की तुलना में ज्यादा औषधीय गुण होते हैं, जो पेट से जुड़े रोगों को कम करने में मदद करता है। यह शरीर का संतुलन भी बनाए रखता है। खाना खाने के बाद अगर पेट फूलना, गैस बनना, कब्ज की परेशानी या फिर भारीपन महसूस होता है तो काले नमक का सेवन इन सभी परेशानियों को खत्म कर देता है। यह पाचन को सहज बनाता है।
हर चीज की तरह काला नमक भी तभी फायदा देता है, जब उसका सेवन सही समय और मात्रा में किया जाएगा। काले नमक का अधिक मात्रा में सेवन करना भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। काले नमक की तासीर गर्म और पाचन में हल्का होता है। यह शरीर में पित्त को नियंत्रित भी करता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मदद करता है।
अगर पेट साफ नहीं होता है, तो सुबह खाली पेट चुटकी भर नमक और गुनगुने पानी का सेवन करें। इससे शरीर से विषाक्त पदार्थों आसानी से बाहर निकाल सकते हैं। हालांकि अगर हाई बीपी, किडनी से संबंधित रोग और हड्डियों से जुड़े रोग से पीड़ित हैं तो खाली पेट नमक का सेवन न करें।
काले नमक का सेवन सूजन और दर्द को भी कम करने में मदद करता है। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए काले नमक और रेत की पोटली बनाकर सिकाई कर सकते हैं। पेट की जलन को शांत करने के लिए भी काले नमक का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए दिन के समय छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर लें। इससे पेट की जलन शांत होगी और गर्मियों में शरीर का पित्त भी संतुलित रहेगा।