जालंधर/चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक सात महीने पहले पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) में मुख्यमंत्री के चेहरे और वर्चस्व को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' अभियान के तहत हो रही बैठकों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का गुट आमने-सामने आ गया है। शनिवार को कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने बिना नाम लिए पूर्व सीएम चन्नी और उनके बेटे रिदमजीत सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही रील पर तंज कसते हुए कहा:
"ज्यादा रील डालने से कोई चुनाव नहीं जीतता। अगर नेता काम का नहीं है तो वह नहीं जीतेगा, चाहे सोशल मीडिया पर जितनी भी पोस्ट कर ले या रील डाल ले। पंजाब में कोई किसी को ऐसे ही जीता या हरा नहीं सकता।"
गौरतलब है कि हाल ही में चन्नी के बेटे रिदमजीत ने एक रील शेयर की थी, जिसमें समर्थकों के साथ चन्नी दिख रहे थे और बैकग्राउंड में डायलॉग था— "कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे... तैयारी थोड़ी बड़ी है, सब्र रखो, पल-पल का हिसाब लेंगे।"
दो जिलों में कार्यकर्ता आपस में भिड़े, कुर्सियां चलीं
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे के दौरान शनिवार (1 अगस्त) को प्रदेश के दो जिलों में स्थिति बेकाबू हो गई:
पटियाला (समाना): यहाँ कार्यक्रम के दौरान चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग का विरोध करते हुए हूटिंग की और चन्नी के पक्ष में नारेबाजी की।
संगरूर (कैलिफोर्निया रिजॉर्ट): संगरूर में वड़िंग और चन्नी गुट के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकी, 'भूपेश बघेल मुर्दाबाद' और 'चरणजीत चन्नी जिंदाबाद' के नारे लगाए।
पूर्व MLA का दावा- वड़िंग को हटाकर रहेंगे, चन्नी का बैठकों से बहिष्कार
पार्टी से सस्पेंड किए गए घनौर (पटियाला) के पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर ने हमला बोलते हुए दावा किया कि अब राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना तय है।
दूसरी ओर, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रभारी भूपेश बघेल और राजा वड़िंग की अगुआई में चल रहे इस पूरे सूबाई अभियान का बहिष्कार कर रखा है। चन्नी गुट का तर्क है कि पंजाब की लगभग 32% दलित आबादी को ध्यान में रखते हुए पार्टी आलाकमान को चुनाव से पहले नेतृत्व व सीएम फेस को लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए।
क्यों चलाया जा रहा है हर बूथ कांग्रेस मजबूत अभियान?
पार्टी की अंदरूनी खींचतान के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल और राजा वड़िंग राज्य के सभी जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस अभियान के पीछे कांग्रेस की चार मुख्य रणनीतियां हैं:
हताश काडर का पुनर्गठन: शीर्ष नेताओं की जंग से नीचे का कार्यकर्ता निराश न हो, इसके लिए ब्लॉक और बूथ स्तर के वर्करों से सीधा संपर्क साधा जा रहा है।
अनुशासन का कड़ा संदेश: अभियान में पार्टी लाइन से बाहर जाकर निर्दलीय चुनाव लड़ चुके नेताओं (जैसे चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह) को बैठकों में नहीं बुलाया जा रहा है।
सत्तारूढ़ AAP और BJP की काट: प्रदेश में आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के माइक्रो-मैनेजमेंट का मुकाबला करने के लिए सीधे बूथ और मोबाइल के ज़रिए चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।
वड़िंग का दावा: राजा वड़िंग ने दावा किया है कि AAP के 6 सांसदों के बाद अब उनके 40 से 45 विधायक भी पार्टी छोड़ने की फिराक में हैं और उनके साथ सीक्रेट बैठकें हो चुकी हैं।