चंडीगढ : पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि बीजेपी सरकार द्वारा गन्ने के रेट में मात्र 15 रुपये की बढ़ोत्तरी करना, किसानों के साथ भद्दा मजाक है। गन्ने की कीमत में सरकार ने मात्र 3% वृद्धि की है। जबकि महंगाई की दर दहाई का आंकड़ा छूने वाली है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आंकड़ों के साथ सरकार को आईना दिखाते हुए बताया कि कांग्रेस सरकार के साढ़े 9 साल (2005 से 2014) में गन्ने के रेट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई। उस समय गन्ने का रेट ₹117 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹310 प्रति क्विंटल कर दिया गया था। यानी कुल ₹193 की बढ़ोतरी हुई यानी 165 प्रतिशत। इस दौरान औसतन हर साल करीब 18.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, भाजपा सरकार के 12 सालों में गन्ने के रेट में सिर्फ ₹120 की बढ़ोतरी हुई। इसे ₹310 से बढ़ाकर ₹430 प्रति क्विंटल किया गया, जो कुल मात्र 39 प्रतिशत की वृद्धि है। इस अवधि में औसतन हर साल सिर्फ करीब 3.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी कांग्रेस ने बीजेपी के मुकाबले 6 गुणा ज्यादा बढ़ोत्तरी की।
यानी किसानों को उचित कीमत देने व उसकी बढ़ोत्तरी के मामले में बीजेपी कांग्रेस के मुकाबले कहीं नहीं ठहरती।
हुड्डा ने कहा कि कुछ ही दिन पहले बीजेपी ने गेहूं उत्पादक किसानों के साथ भी क्रूर मजाक किया था। गेहूं के एमएसपी में मात्र ₹25 की बढोत्तरी की गई थी। यानी मात्र 25 पैसे प्रति किलो। बकि बीजेपी सरकार के दौरान हर साल महंगाई बेतहाशा गति से बढ़ती जा रही है। आज पेट्रोल, डीजल, गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। खेती के उपकरणों से लेकर खाद, बीज, दवाई और मजदूर तक इतनी महंगी हो गई है कि किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान 2006-2007 में गेहूं के रेट को ₹600 रुपये से बढ़ाकर सीधे ₹850 रुपये कर दिया गया था। यानी एक साथ ₹250 रुपये बढ़ाये गए थे। इतना ही नहीं 100 रुपये का अलग से बोनस भी दिया गया था।
कांग्रेस के साथ तुलना की जाए तो हमारे कार्यकाल में फसलों के रेट में हर साल औसतन 14-15% की बढ़ोत्तरी होती थी। जबकि बीजेपी के कार्यकाल में यह घटकर मात्र 5% रह गई है। यानी कांग्रेस एमएसपी में बीजेपी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा बढ़ोत्तरी करती थी।