नई दिल्ली(एजेंसी) : सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस की अगुआई में विपक्ष ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया और फिर राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी मांगों को लेकर याचिका फाइल की। हालांकि इस पूरे मार्च में कॉकरोच जनता पार्टी का एक भी सदस्य दिखाई नहीं दिया। वहीं मार्च से पहले सीजेपी ने विपक्ष के मार्च का समर्थन करने को ऐलान किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स ने जब इसको लेकर सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि किसी का समर्थन करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसके प्लैटफॉर्म पर भी उपस्थित रहा जाए।
उन्होंने कहा, जो लोग भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, हम उनके साथ हैं। किसी के साथ काम करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों एक ही प्लैटफॉर्म पर एक ही समय हों। इस तरह से काम नहीं होता है। हमारे अजेंडा के साथ जो लोग भी हैं हम उनका समर्थन करते हैं। रांका ने कहा, बीजेपी इस तरह के नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करती है कि 10 अक्टूबर को हमारे प्रोटेस्ट में वे नहीं थे और 12 अक्टूबर को उनके साथ हम नहीं थे। हमारा कहना है कि सरकार पर दबाव सब तरफ से बनना चाहिए।
उन्होंने कहा, बीजेपी बहुत डरी हुई है और इसलिए सीजेपी और विपक्ष में फूट डलवाना चाहती है। रांका ने कहा कि पिछले तीन दिनों में जो कुछ हुआ वह सब हमने देखा है। हम नई रणनीति के साथ लौटेंगे।
फ्लाइट में हिरासत में लिए जाने को लेकर क्या कहा
फ्लाइट में ही हिरात में लिए जाने पर आशुतोष रांका ने कहा, हम सभी हैरान थे। हमारे पास करीब 30 पुलिसवाले खड़े थे। हमें पता चला कि ये सब हमारे ही लिए आए हें। एयरलाइन के स्टाफ को भी नहीं पता था कि ऐसा कुछ होने वाला है। वे हमें एक बस में लेकर गए और इसके बाद अलग-अलग निजी गाड़ियों से अलग-अलग लेकर चले गए। अभिजीत दीपके को वसंत कुंज एनक्लेव भेज दिया गया। सौरव दास को आरके पुरम और मुझे नजफगढ़। मुझे सुबह के 2.30 बजे तक नजफगढ़ में रखा गया और फिर अभिजीत दीपके के पास ले जाया गया।
हिरासत में कैसा था पुलिस का व्यवहार
रांका ने कहा कि पुलिस ने हिरासत के दौरान कोई भी दुर्व्यवहार नहीं किया। उन्होंने हमसे ठीक से बात की और खाना भी ऑफर किया। हालांकि हमें अपने वकील से नहीं बात करने दिया गया। सुबह के 3 बजे बताया गया कि हमें गिरफ्तार किया गया है और अब वकील को फोन कर सकते हैं। उन्होंने कहा, हमें पैरंट्स से बात करने की इजाजत थी पर वकील से बात करने की नहीं थी। चार बजे मुझे पिता से बात करने को कहा गया और मैंने उनसे ही वकील की व्यवस्था करने को कहा।
पूरी रात करते रहे परेशान
रांका ने कहा कि पुलिस पूरी रात कुछ ना कुछ बोलकर परेशान करती रही। रात में 10.30 से 11.30 के बीच मेजिकल कराया गया था। कोई मेरा शुगर लेवल चेक करने आया था। वे रात में मुझे दूसरे थाने लगे गए। चार घंटे तक कार में बैठाकर रखा और पूरी रात परेशान करते रहे। मुझे लग रहा था कि पुलिस मुझे एनएसए के तहत गिरफ्तार करेगी और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा। बॉन्ड साइइन करने को लेकर उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद है। सिर्फ शांति भंग ना करने की शर्त पर धारा 170 के तहत छोड़ा गया है। निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने से हमें कोई नहीं रोक सकता।