Wednesday, October 07, 2026
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राष्ट्रीय

एशियाई खेल 2026: नई दिल्ली से आइची-नागोया तक भारत की गौरवशाली यात्रा

07 अक्टूबर, 2026 01:13 PM

नई दिल्ली(एजेंसी) : एशियाई खेल 2026 भारत की खेल यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ गए। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य समेत कुल 85 पदक जीते। 36 खेल स्पर्धाओं में 501 एथलीटों के दल के साथ उतरे भारत ने पारंपरिक खेलों के साथ-साथ टीम स्पर्धाओं और उभरते खेलों में भी मजबूत प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि न केवल महाद्वीपीय स्तर पर भारत की बढ़ती खेल शक्ति को दर्शाती है, बल्कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक और 2036 ओलंपिक की दीर्घकालिक तैयारियों की दिशा में भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।

एशियाई खेल 2026 एक नजर में
एशियाई खेल, जिन्हें एशियाड के नाम से भी जाना जाता है, एशिया की सबसे बड़ी बहु-खेल प्रतियोगिता है। एशिया ओलंपिक परिषद (ओसीए) के तत्वावधान में हर चार साल में आयोजित होने वाले इन खेलों में वर्तमान में 45 देश और क्षेत्र हिस्सा लेते हैं। 20वें एशियाई खेल जापान के आइची-नागोया में आयोजित किए गए, जिनका आधिकारिक नारा ‘एक एशिया की कल्पना’ था। जापान ने इससे पहले 1958 में तोक्यो और 1994 में हिरोशिमा में एशियाई खेलों की मेजबानी की थी। इस तरह आइची-नागोया में आयोजन के साथ जापान तीसरी बार एशियाई खेलों का मेजबान बना। 16 दिनों तक चले इस आयोजन में 43 खेलों और 71 खेल विधाओं में 469 स्पर्धाएं हुईं, जिनमें कुल 1,407 पदक दांव पर थे।

जापान में एशियाई पैरा खेलों की भी मेजबानी
एशियाई खेलों के बाद जापान 18 से 24 अक्टूबर, 2026 तक आइची-नागोया में 5वें एशियाई पैरा खेलों की मेजबानी करेगा। यह पहली बार है जब जापान एशियाई पैरा खेलों की मेजबानी कर रहा है। प्रतियोगिता में एशिया की 45 राष्ट्रीय पैरालंपिक समितियों के करीब 3,000 एथलीटों के हिस्सा लेने की उम्मीद है और इसमें 18 पैरा खेल शामिल होंगे।

आइची-नागोया 2026 के प्रतीक में संस्कृति और खेल का संगम
आइची-नागोया एशियाई खेलों के आधिकारिक प्रतीक में स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और खेल की गतिशीलता को जोड़ा गया है। प्रतीक की वक्र रेखाएं जीवंतता का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि बैंगनी, सुनहरी और हरी केंद्र रेखाएं लोगों के एकजुट होकर चमकीले लाल सूरज की ओर बढ़ने का संदेश देती हैं। बैंगनी रंग आइची के प्रीफेक्चुरल फूल आईरिस का प्रतीक है, सुनहरा रंग नागोया कैसल के प्रसिद्ध किंशाची से प्रेरित है और हरा रंग आइची-नागोया की पर्यावरणीय चेतना को दर्शाता है। प्रतीक में एशिया, आइची और नागोया के पहले अक्षरों ‘ए’ और ‘एन’ को भी रचनात्मक ढंग से शामिल किया गया है।

‘होनोहोन’ ने जगाया खेलों का जुनून
20वें एशियाई खेलों का आधिकारिक शुभंकर ‘होनोहोन’ एथलीटों के जुनून और ऊर्जा का प्रतीक रहा। इसका नाम जापानी शब्द ‘होनोहो’ से जुड़ा है, जिसका संबंध लौ से है। शुभंकर का डिजाइन शचिहोको से प्रेरित है, जो नागोया कैसल के प्रमुख प्रतीकों में से एक है और आइची-नागोया का रक्षक माना जाता है।

1951 में नई दिल्ली से शुरू हुआ भारत का एशियाई सफर
एशियाई खेलों के साथ भारत का रिश्ता इसकी शुरुआत से ही जुड़ा रहा है। पहला एशियाई खेल 1951 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। यह आयोजन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशियाई देशों के बीच संबंध मजबूत करने और युद्ध तथा उपनिवेशवाद से प्रभावित क्षेत्र में एकता का संदेश देने के प्रयासों का हिस्सा था। एशियाई खेलों की अवधारणा भारत की अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य प्रो. जी.डी. सोंधी ने रखी थी। 1947 में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई देशों के सम्मेलन में एशियाई खेलों के आयोजन का सुझाव दिया गया था।

पहले एशियाई खेलों में भारत दूसरे स्थान पर रहा
मार्च 1951 में नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पहले एशियाई खेलों के उद्घाटन की घोषणा की थी। इस आयोजन में 11 देशों के 489 एथलीटों ने छह खेलों में हिस्सा लिया। भारत पदक तालिका में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद एशियाई खेल एक ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में बदलते गए, जिसने खेल के माध्यम से एशियाई देशों के बीच मित्रता, सहयोग और विविधता को बढ़ावा दिया।

आइची-नागोया में भारत का अब तक के बड़े दलों में एक
भारत ने आइची-नागोया 2026 में अपने सबसे बड़े बहु-खेल प्रतिनिधिमंडलों में से एक को उतारा। भारतीय दल में 36 खेल स्पर्धाओं के 501 एथलीट शामिल थे, जिनमें 300 से अधिक एथलीट पहली बार एशियाई खेलों में हिस्सा ले रहे थे। इससे भारतीय खेलों में बढ़ती प्रतिभा और मजबूत होती बेंच स्ट्रेंथ का संकेत मिला।

नई दिल्ली में हुआ भव्य विदाई समारोह
भारतीय दल के जापान रवाना होने से पहले 8 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पी.टी. उषा और शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसी दौरान आधिकारिक भारतीय दल की जर्सी का अनावरण भी किया गया। भारतीय ओलंपिक संघ ने इस समारोह का आयोजन किया था।

मनु भाकर और पवन सेहरावत ने संभाली भारत की अगुवाई
19 सितंबर, 2026 को आयोजित उद्घाटन समारोह में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सेहरावत ने भारत की परेड का नेतृत्व किया। दोनों की अगुवाई में भारतीय दल ने महाद्वीपीय खेलों के इस बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

21 स्वर्ण के साथ भारत का शानदार प्रदर्शन
आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत का अभियान 21 स्वर्ण पदकों की उपलब्धि से खास रहा। तीरंदाजी ने पांच स्वर्ण पदकों के साथ भारत की स्वर्ण तालिका में सबसे बड़ा योगदान दिया, जबकि शूटिंग और बॉक्सिंग ने तीन-तीन स्वर्ण पदक जीते। कुश्ती ने दो स्वर्ण पदक हासिल किए। टीम स्पर्धाओं में क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-दो स्वर्ण पदक दिलाए। पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रनों से हराकर स्वर्ण जीता, जबकि पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर अपना महाद्वीपीय खिताब बरकरार रखा। पुरुष और महिला दोनों कबड्डी टीमों ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत के खाते में दोहरी सफलता जोड़ी। इसके अलावा एथलेटिक्स और गोल्फ में एक-एक स्वर्ण पदक ने भारत की कुल स्वर्ण संख्या को 21 तक पहुंचाया।

85 पदकों के साथ पदक तालिका में भारत
भारत ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में कुल 85 पदक जीते। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे। एथलेटिक्स 24 पदकों के साथ भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसमें एक स्वर्ण, नौ रजत और 14 कांस्य पदक शामिल हैं। शूटिंग ने तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य समेत 15 पदक जीते। तीरंदाजी ने पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य के साथ नौ पदक हासिल किए। बॉक्सिंग और कुश्ती ने छह-छह पदक जीते, जबकि स्क्वैश ने पांच पदक हासिल किए। क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में भारत ने दो-दो स्वर्ण पदक जीते। गोल्फ में एक स्वर्ण और एक रजत पदक मिला। नौकायन, भारोत्तोलन, वुशु, बैडमिंटन, कुराश, मिश्रित मार्शल आर्ट, रोइंग, सेपक टकरा, सॉफ्ट टेनिस और टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते।

पांचवीं बार एशियाई पैरा खेलों में उतरेगा भारत
आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों में भारत अपनी पांचवीं भागीदारी दर्ज करेगा। भारत अपनी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के माध्यम से इन खेलों में हिस्सा लेगा। हांग्जो 2022 एशियाई पैरा खेलों में भारत ने 29 स्वर्ण समेत कुल 111 पदक जीते थे। इनमें महिला एथलीटों का योगदान 40 पदकों का रहा, जो कुल पदकों का करीब 36% था। इससे पहले भारत ने 2010 में 14, 2014 में 33 और 2018 में 72 पदक जीते थे।

‘खेलो भारत नीति’ से खेल व्यवस्था को नई दिशा
सरकार ने 1 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय खेल नीति ‘खेलो भारत नीति’ शुरू की। इसका उद्देश्य मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन आधारित खेल व्यवस्था तैयार करना है। नीति के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रशिक्षण तथा खेल सुविधाओं की असमानता को कम करने पर जोर दिया गया है। सामुदायिक भागीदारी और साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षण लागत कम करने के साथ-साथ 2036 ओलंपिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत खेलों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने के साथ महिलाओं, आदिवासी समुदायों और दिव्यांगजनों की भागीदारी को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

खेलों के लिए रिकॉर्ड वित्तीय सहायता
केंद्रीय बजट 2026-27 में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय को 4,479.88 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है। यह 2013-14 के 1,219 करोड़ रुपए के आवंटन से काफी अधिक है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रीय खेल महासंघों समेत कुल 36,441 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रस्तावित है। अकेले खेलो इंडिया के लिए 2026-27 में 924.35 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा खेल सामग्री के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।

जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान
खेलो इंडिया जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तलाशने और विकसित करने की प्रमुख सरकारी पहल है। जुलाई 2026 तक देश में 1,067 खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए जा चुके थे। इसके तहत 3,176 करोड़ रुपए की लागत वाली 349 नई खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। खेलो इंडिया के तहत 2,745 एथलीटों को कोचिंग, खेल उपकरण, चिकित्सा सुविधाएं और मासिक भत्ते का समर्थन दिया जा रहा है। 2018 से अब तक 63,000 से अधिक एथलीट खेलो इंडिया गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं।

‘कीर्ति’ से युवा प्रतिभाओं को मिल रहा मंच
खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन (कीर्ति) पहल 9 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके तहत 174 प्रतिभा मूल्यांकन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां डेटा आधारित उपकरणों के माध्यम से पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।

शीर्ष एथलीटों के लिए ‘टॉप्स’ का सहारा
लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के माध्यम से भारत के शीर्ष एथलीटों को विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, कोचिंग शिविरों और विशेष उपकरणों के लिए सहायता दी जाती है। योजना के तहत एथलीटों को 50,000 रुपए का मासिक वजीफा मिलता है, जबकि विकास समूह के जूनियर एथलीटों को हर महीने 25,000 रुपए दिए जाते हैं। अप्रैल 2026 तक टॉप्स के तहत 55 कोर एथलीट, 62 पैरा कोर एथलीट और 140 डेवलपमेंट एथलीटों को सहायता दी जा रही थी। इसके अलावा हॉकी के 67 कोर एथलीट भी योजना के दायरे में थे। टॉप्स ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत के पदक प्रदर्शन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा और फिटनेस पर भी जोर
इंफाल में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना 2018 में की गई थी। विश्वविद्यालय में खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रबंधन और कोचिंग जैसे क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान की जाती है। वहीं फिट इंडिया मूवमेंट के माध्यम से लोगों को फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अगस्त 2025 में संसद ने राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक पारित किया, जिसमें खेल संगठनों की मान्यता के लिए राष्ट्रीय खेल बोर्ड और खेल विवादों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का प्रावधान किया गया है।

आइची-नागोया से लॉस एंजिल्स और 2036 तक का सफर
आइची-नागोया 2026 भारत के व्यापक खेल रोडमैप का एक अहम पड़ाव है, जिसका अगला बड़ा लक्ष्य लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक और उसके बाद 2036 ओलंपिक है। एशियाई खेलों में भारत के 501 सदस्यीय दल में 300 से अधिक एथलीटों का पदार्पण इस बात का संकेत है कि देश में प्रतिभाओं का आधार लगातार व्यापक हो रहा है। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों की बड़ी भागीदारी भारतीय खेलों में बढ़ती गहराई और मजबूत होती बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाती है।

36,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की तैयारी
देश में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली दस साल की योजना की रूपरेखा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य 2036 से पहले भारत को वैश्विक खेल मंच पर और मजबूत स्थिति में पहुंचाना है। खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों, राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वित 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है, ताकि प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा तक पूरी खेल व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।

85 पदकों ने बढ़ाई भविष्य की उम्मीद
आइची-नागोया में 21 स्वर्ण समेत 85 पदकों का भारत का प्रदर्शन देश की खेल यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। पारंपरिक रूप से मजबूत खेलों में शानदार प्रदर्शन के साथ नए और उभरते खेलों में मिली सफलता ने भारतीय दल की क्षमता का दायरा बढ़ाया है। यह अभियान न केवल एशियाई स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक और 2036 ओलंपिक के लिए तैयार हो रही दीर्घकालिक रणनीति को भी नई गति देता है।

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