Monday, August 17, 2026
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एआई खतरा नहीं, बल्कि बदलाव और विकास का अवसर: रुब्रिक सीईओ

15 फ़रवरी, 2026 02:32 PM

वॉशिंगटन: अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने जा रहे एआई इम्पैक्ट समिट से पहले डेटा सुरक्षा कंपनी रुब्रिक के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विपुल सिन्हा ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस समय भारत का यह समिट आयोजित करना बेहद अहम है, क्योंकि अब देश एआई को ऊर्जा, कंप्यूटिंग और एजेंट्स जैसे अलग-अलग स्तरों पर समझते हुए उसे जमीन पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई केवल तकनीक नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद इसे कारोबार और रोजमर्रा की प्रक्रियाओं में इस्तेमाल करना है।

सिन्हा ने कहा कि पहले दुनिया में हुए कई एआई सम्मेलनों में इस तकनीक के खतरों पर ज्यादा चर्चा हुई, लेकिन नई दिल्ली में होने वाला यह समिट अवसर और प्रभाव पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत टेक्नोलॉजी वर्कफोर्स और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश है, जिससे वह 'एप्लाइड एआई' यानी उपयोग आधारित एआई के क्षेत्र में वैश्विक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने माना कि एआई में जोखिम भी हैं, लेकिन अवसर कहीं ज्यादा बड़े हैं। भारत ने जिस तरह मोबाइल, इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट और पहचान प्रणालियों में तेज बदलाव देखा, उसी तरह एआई भी ज्ञान की खाई को कम कर सकता है और आम लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है।

रोजगार को लेकर उठ रही चिंताओं पर सिन्हा ने कहा कि एआई से जुड़ी नौकरियों को लेकर डर कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। उनका मानना है कि जैसे पहले कृषि, औद्योगिक और ज्ञान आधारित काम के दौर आए, वैसे ही अब 'इंट्यूशन लेबर' का दौर आएगा, जहां नई तरह के रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि एआई मॉडल बनाने के लिए सीमित विशेषज्ञों की जरूरत होती है, लेकिन उसे लागू करने और व्यवसायों में उतारने के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियरों और पेशेवरों की आवश्यकता होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अभी एआई मॉडल विकास में सबसे आगे है और चीन उसके बाद आता है, जबकि भारत ने एप्लाइड एआई पर ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर निर्माण, जीपीयू और डेटा सेंटर में किए जा रहे निवेश को सकारात्मक कदम बताया। उनके अनुसार, सरकार की तेजी, पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी और डेटा सेंटर के लिए टैक्स छूट जैसे कदम भारत को वैश्विक एआई आपूर्ति केंद्र बना सकते हैं।
समिट में लोगों, पर्यावरण और प्रगति जैसे विषयों पर चर्चा होगी, जिसमें रोजगार प्रशिक्षण, ऊर्जा की जरूरत और समावेशी विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत के विशाल आकार और विकास से आकर्षित हो रही हैं। सिन्हा ने कहा, "भारत एक बड़ा बाजार है, सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और हर कोई भारत को अगली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखता है।" उन्होंने हाल के निवेशों को स्थानीय स्तर पर उत्पाद बनाने और उन्हें "भारतीय बाजार में सर्वोत्तम संभव कीमतों पर पहुंचाने" का एक तरीका बताया। सिन्हा ने कहा कि शिखर सम्मेलन का एजेंडा "लोग, ग्रह और प्रगति" के इर्द-गिर्द घूमेगा, जिसमें रोजगार पुनर्प्रशिक्षण, ऊर्जा मांग और समावेशी विकास पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि एआई से समाज के सभी वर्गों को फायदा मिले और ग्लोबल साउथ पीछे न रह जाए। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है, बशर्ते इसका इस्तेमाल सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई भले ही बहुत सारी जानकारी दे सकता है, लेकिन संदर्भ और गहराई से समझाने का काम पत्रकारिता ही कर सकती है। नई दिल्ली में होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट दुनिया भर की सरकारों, टेक कंपनियों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाएगा। ऐसे समय में जब दुनिया एआई के नियमों, ऊर्जा खपत और सामाजिक प्रभावों पर बहस कर रही है, भारत खुद को एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

 

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