ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से ईरान के कार्यवाहक विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. मसूद शम्स-बख्श ने मुलाकात की। दोनों पक्षों ने भारत और ईरान के बीच शिक्षा, शोध, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
शिक्षा और शोध सहयोग मजबूत करने पर जोर
भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि डॉ. मसूद शम्स-बख्श ने प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक में भारत और ईरान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर आधुनिक शिक्षा सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर
बातचीत में शैक्षणिक और शोध सहयोग को मजबूत करने, वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने तथा छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने डिजिटल शिक्षा के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार किया।
विज्ञान और नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
ईरानी दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने मौजूदा संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर विज्ञान एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया। युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए अवसर तैयार करने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।
ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों ने अपनाया घोषणापत्र
इसी बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के शिक्षा मंत्रियों ने सर्वसम्मति से ‘ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों का घोषणापत्र’ अपनाया। इसे शिक्षा के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
पांच प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष फोकस
घोषणापत्र में प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा को मजबूत करने, कौशल विकास एवं योग्यताओं की आपसी मान्यता, ब्रिक्स टीवीईटी सहयोग गठबंधन के तहत बेहतर समन्वय, सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने तथा शैक्षणिक नेतृत्व के लिए क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
समावेशी शिक्षा व्यवस्था पर जोर
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि बैठक ने समावेशी, मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था तैयार करने के लिए संस्थागत सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने के नए अवसर प्रदान किए हैं। भारत और ईरान के बीच शिक्षा एवं वैज्ञानिक सहयोग बढ़ने से छात्रों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भविष्य में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।