श्रीहरिकोटा : जीएसएलवी-एफ18 ने एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। मिशन की सफलता पर इसरो के प्रमुख वी नारायणन ने खुशी जताई और कहा कि नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 को बिल्कुल सटीक तरीके से उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचा दिया है। एनवीएस-03 को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए जाने पर इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने समाचार एजेंसी से कहा, "बेहतर पीएनटी (पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग) सेवाओं के लिए कम से कम चार उपग्रहों की जरूरत होती है और आज के लॉन्च के साथ हमारे पास कक्षा में चार उपग्रह हो जाएंगे। हालांकि, निरंतर सेवा और सटीक पोजीशनिंग सुनिश्चित करने के लिए, हमें कक्षा में कुल सात उपग्रह स्थापित करने होंगे। दो और उपग्रह अभी तैयार होने के अंतिम चरण में हैं, और एक उपग्रह को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना खुद का नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (उपग्रह समूह) है।" इस दौरान इसरो प्रमुख ने 'गगनयान' समेत वर्तमान वित्तीय वर्ष के आगामी मिशनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "इस वित्तीय वर्ष में मारा लक्ष्य 5 और लॉन्च करने का है, जिसमें बिना क्रू वाला 'गनयान जी'मिशन भी शामिल है। इसके अलावा, हमारा लक्ष्य कम से कम दो पीएसएलवी और दो स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) लॉन्च करना है। साथ ही, हम एक प्राइवेट लॉन्च की भी योजना बना रहे हैं। कुल मिलाकर हम 6 लॉन्च के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन कम से कम 5 लॉन्च पूरे करने की हमारी योजना है।"
उन्होंने कहा, "'गगनयान' एक बहुत ही प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण, तकनीक-प्रधान कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य हमारे अपने लॉन्च व्हीकल का उपयोग करके हमारे अपने अंतरिक्ष यात्रियों (गगन यात्रियों) को अंतरिक्ष में भेजना है। अब तक हम 8,000 से अधिक परीक्षण पूरे कर चुके हैं। वास्तविक मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले, हमें तीन ऐसे मिशन पूरे करने हैं जिनमें कोई इंसान नहीं होगा।"
वी. नारायणन ने कहा हमारे गगन यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए, हम सभी पहले 'अनक्रूड मिशन' पर काम कर रहे हैं। एलपीएस के डायरेक्टर ने कई सिस्टम तैयार किए हैं; URC के डायरेक्टर और अन्य टीमें कई सिमुलेशन टेस्ट कर रही हैं। IPRC और BSSE की टीमों ने पूरा लॉन्च व्हीकल तैयार किया है।
एलपीएस के निदेशक और उनकी टीम ने कई सिस्टम तैयार किए हैं। यूआरसी के निदेशक के नेतृत्व में कई सिमुलेशन टेस्ट चल रहे हैं। आईपीआरसी और बीएसएसई की टीमों ने पूरा लॉन्च व्हीकल तैयार किया है। वे सर्विस मॉड्यूल और क्रू मॉड्यूल से जुड़े सॉफ्टवेयर बनाने में भी योगदान दे रहे हैं। काम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है। भारत के प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हमें पूरा विश्वास है कि हम बहुत जल्द इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लेंगे।