राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की जा रही है। लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि अब इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए। साथ ही आरोप लगाए हैं कि सरकार को वांगचुक की कोई चिंता नहीं है। वह बीते 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनका वजन लगातार गिर रहा है।
महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, 'सोनम सर आपके अनशन ने देश के युवाओं को उनके न्याय के संघर्ष में एकजुट कर दिया है। आपका मकसद पूरा हो गया है। सरकार को आपके जीवन या उन करोड़ों युवाओं की कोई भी चिंता नहीं है। लेकिन आपका जीवन हमारे लिए मायने रखता है। प्लीज अपना अनशन खत्म कर दें और लड़ाई को जारी रखें।'
तेजी से गिर रहा वजन
सोमवार को CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने बताया कि वांगचुक का 8.2 किलोग्राम वजन घट चुका है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यह कहते हुए केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की कि 'लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं।' वह लगातार 17 दिनों से अनशन पर बैठे हैं।
सीजेपी की ओर से जारी स्वास्थ्य सूचना के मुताबिक, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का कुल वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है, उनकी ब्लड ग्लूकोज का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया है और उनका रक्तचाप 107/70 एमएमएचजी दर्ज किया गया।
बीते 24 दिनों से सीजेपी का प्रदर्शन लगातार चल रहा है। दीपके ने सवाल उठाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की बिगड़ती सेहत के बावजूद सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत क्यों शुरू नहीं की। उन्होंने कहा, 'मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं।'
उन्होंने कहा, 'अपनी गलती मानना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह परिपक्वता, जवाबदेही और अपनी गलती सुधारने की इच्छा का संकेत है। हम बस जवाबदेही चाहते हैं।' दीपके ने आरोप लगाया कि वांगचुक की बिगड़ती हालत के बावजूद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोई पहल नहीं की।
उन्होंने कहा, 'यह कैसी सरकार है? सोनम वांगचुक इसी देश के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने काम से भारत को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। आज वह देश के विद्यार्थियों के लिए लड़ रहे हैं, फिर भी सरकार ने उनसे बात करने के लिए किसी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा है। सरकार की यह पूरी तरह से बेरुखी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।'
अन्ना हजारे से तुलना
साल 2011 में हुए अन्ना हजार के 12 दिनों के अनशन से भी इसकी तुलना की जा रही है। हज़ारे ने सबसे पहले पांच अप्रैल 2011 को भूख हड़ताल शुरू की थी और चार दिन बाद इसे खत्म कर दिया था, जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई थी। अगस्त 2011 में हजारे ने एक बार फिर भूख हड़ताल शुरू की जो 12 दिनों तक चली।
विपक्ष के नेता हो सकते हैं शामिल
उन्होंने कहा कि उन लोगों ने वांगचुक से कई बार अपना अनशन खत्म करने की अपील की थी, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता ने तब तक पीछे हटने से इनकार कर दिया है जब तक सरकार उनकी मांगें मान नहीं लेती। दीपके ने यह भी कहा कि संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च में कई विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।