नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया है। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में बोलते हुए कहा कि आतंकवाद से न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि निवेश और व्यापार भी प्रभावित होते हैं। आतंकवाद समाज को कट्टरपंथ की ओर धकेलता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं।
आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ताजिकिस्तानी की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। इससे निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते। आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के लिए भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
आतंकवाद के पूरे तंत्र को मजबूती और सामूहिक प्रयासों से समाप्त किया जाना चाहिए
उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को मजबूती और सामूहिक प्रयासों से समाप्त किया जाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में नेताओं ने संगठन की 25 वर्षों की यात्रा की समीक्षा की थी। यह अवसर अब तक की उपलब्धियों पर विचार करने के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस सम्मेलन में संगठन से सुरक्षा, संपर्क और अवसर के क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया था।
सुरक्षा से निवेश के अवसर पैदा होते हैं
राजनाथ सिंह ने कहा कि ये तीनों स्तंभ एक-दूसरे को मजबूत बनाते हैं। सुरक्षा से निवेश के अवसर पैदा होते हैं, संपर्क से व्यापार को बढ़ावा मिलता है और इन दोनों के माध्यम से लोगों के लिए नए अवसर तैयार होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा शंघाई सहयोग संगठन चाहता है जो सदस्य देशों के बीच सहमति से काम करे और ठोस परिणाम दे। भारत इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक
उन्होंने कहा कि भारत ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशांबे में मादक पदार्थ विरोधी केंद्र को शंघाई सहयोग संगठन की स्थायी संस्थाएं बनाने के बिश्केक में लिए गए फैसलों का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे आपस में कितना अच्छा तालमेल बनाती हैं और कितनी तेजी से अपने कार्यों को पूरा करती हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी समावेशी होनी चाहिए
रक्षा मंत्री ने आर्थिक सहयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी समावेशी होनी चाहिए और इससे प्रत्येक देश को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अधिक मजबूत और संकटों का सामना करने में सक्षम आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने, व्यापार और निवेश को आसान बनाने तथा विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की दिशा में काम करना चाहिए।
आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे
राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। भारत वर्ष 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को अपनाने का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि उसके लाभ को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाना भी होना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया
उन्होंने कहा कि साझा समृद्धि के लिए संपर्क व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भारत ऐसी संपर्क परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो बाजारों को जोड़ें, व्यापार को आसान बनाएं और विकास के नए अवसर पैदा करें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
हालांकि, रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि संपर्क परियोजनाएं परामर्श और उनमें शामिल प्रत्येक देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों का सम्मान नहीं करतीं, वे टिकाऊ नहीं हो सकतीं। रक्षा मंत्री ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई में मध्य एशिया की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई थी। उन्होंने इसमें मध्य एशिया के देशों और शंघाई सहयोग संगठन के साझेदार देशों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संगोष्ठी के साथ पहली बार शंघाई सहयोग संगठन एशियाई आर्थिक संवाद का आयोजन किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना था।