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हिमाचल

अब भूस्खलन से पहले मिलेगी सटीक चेतावनी, IIT मंडी ने लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम किया विकसित

08 जुलाई, 2026 07:05 PM

हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन की घटनाओं के प्रति समय रहते आगाह करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली आपदा की तैयारियों को मजबूत करने और जोखिम कम करने में मदद करेगी। संस्थान ने बुधवार को यह जानकारी दी।

संस्थान ने एक बयान में कहा कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, जहां बार-बार मिट्टी धंसने, चट्टानों के खिसकने की घटनाएं होती हैं। इससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। बयान के अनुसार, नव विकसित भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली (एलईडब्ल्यूएस) इलाके की बनावट से जुड़ी संवेदनशीलता और वास्तविक समय में बारिश के डेटा का इस्तेमाल करके भूस्खलन की आशंका का अनुमान लगाती है और उस पर नजर रखती है। बयान में कहा गया है, ''भारत में मौजूदा अन्य भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणालियों की तुलना में, जिनकी भौगोलिक दायरे को लेकर कुछ सीमाएं हैं, आईआईटी मंडी द्वारा विकसित और लागू यह पूर्व चेतावनी प्रणाली पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र में लागू की गई है। इस लिहाज से यह देश के लिए विकसित सबसे व्यापक प्रणालियों में से एक है।''

इस प्रणाली के माध्यम से उन इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया जाता है जहां भूस्खलन का खतरा होता है, ताकि संबंधित अधिकारी और आपदा प्रबंधन एजेंसियां जरूरी सावधानियां बरत सकें। इस शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के 'स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग' के प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला ने किया, और उनके साथ शोधार्थी अंकित सिंह एवं नितेश धीमान भी शामिल थे। प्रोफेसर शुक्ला ने कहा, ''मानसून की शुरुआत के साथ ही हमारी इस प्रणाली से वेब-आधारित एप्लिकेशन के जरिये प्रतिदिन भूस्खलन का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। यह प्रणाली पहले से ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती है, जिससे प्रशासन और स्थानीय समुदाय समय रहते निकासी तथा आपदा से निपटने की तैयारियां कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ''उपग्रह आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियां आपदा जोखिम को कम करने के लिए सबसे प्रभावी निवेशों में से एक हैं। ये वैज्ञानिक आंकड़ों को समय पर लागू किए जा सकने वाले निर्णयों में बदल देती हैं।''

आईआईटी मंडी की टीम ने गूगल अर्थ इंजन आधारित एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता अद्यतन स्थिति के साथ-साथ पिछले तीन दिनों के भूस्खलन का पूर्वानुमान भी देख सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, एलईडब्ल्यूएस से समय पर और स्थान-विशिष्ट चेतावनियां जारी कर क्षेत्र में आपदा तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को काफी मजबूती मिलेगी, जिससे आर्थिक नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी। 

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