अंबाला : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने सोमवार को अंबाला छावनी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने खड़गे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध करते समय भाषा और संस्कृति की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। भाजपा कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विज ने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों को सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली की समीक्षा करने तथा उनका विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, विरोध का भी एक स्तर और नैतिकता होती है। उन्होंने कांग्रेस से राजनीतिक मुद्दों को संस्कारपूर्ण तरीके से उठाने की नसीहत दी।
कांग्रेस पर श्रमिकों और आम लोगों के अपमान का आरोप
अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने को लेकर की जाने वाली टिप्पणियां देश के मेहनतकश लोगों का अपमान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चाय बेचकर, रिक्शा चलाकर, रेहड़ी लगाकर या मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करना क्या अपराध है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि किसी भी सामान्य पृष्ठभूमि का व्यक्ति अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।
विज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता को सम्मान दिया जाता है और राजनीतिक बहस में परिवार के सदस्यों को निशाना बनाने से बचना चाहिए।
‘सरकार बदलने के लिए जनता का विश्वास जीतना जरूरी’
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल कर रहा है। उन्होंने विपक्ष के ‘चेंज द रेजीम’ संबंधी नारे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव जीतकर ही किया जा सकता है। विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपनी योजनाएं और नीतियां रखनी चाहिए तथा सरकार की कमियों को सामने लाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने विवेक से मतदान करती है और राजनीतिक दलों को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। विज ने विपक्ष से अपील की कि वह अपने बयानों और गतिविधियों में संयम बरते।
1 नवंबर की रैली को लेकर भी उठाए सवाल
विज ने कांग्रेस की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली का उल्लेख करते हुए आशंका जताई कि बड़े स्तर पर लोगों को जुटाने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बयान का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की आलोचना की। ये आशंकाएं और आरोप मंत्री ने अपने संबोधन में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का अधिकार है, लेकिन किसी भी कार्यक्रम का उद्देश्य शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना होना चाहिए।
कांग्रेस को भाषा और आचरण में संयम बरतने की सलाह
अनिल विज ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को देश की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि खड़गे की टिप्पणी के विरोध में पुतला दहन किया गया है।
प्रदर्शन में भाजपा कार्यकर्ता और अन्य लोग मौजूद रहे।