Tuesday, August 25, 2026
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अनिल विज का बड़ा परिवहन प्लान: हरियाणा में 2030 तक दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक और गैर-जीवाश्म ईंधन वाली बसें

25 अगस्त, 2026 06:54 PM

हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल, आधुनिक और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परिवहन मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में प्रदेश के सरकारी बस बेड़े को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित तकनीक में बदलने की तैयारी की जा रही है। सरकार का व्यापक लक्ष्य वर्ष 2030 तक हरियाणा राज्य परिवहन उपक्रम की बसों को इलेक्ट्रिक अथवा हाइड्रोजन और फ्यूल सेल जैसी स्वच्छ तकनीकों में बदलना है। इस नीति का उद्देश्य केवल डीजल बसों की जगह ई-बसें उतारना नहीं, बल्कि प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की पूरी व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देना है। इसके तहत नए ई-बस डिपो, चार्जिंग स्टेशन, डिजिटल निगरानी, यात्रियों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ा जा रहा है।

अनिल विज के नेतृत्व में परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव
परिवहन मंत्री अनिल विज के लिए ई-बस योजना केवल परिवहन बेड़े के आधुनिकीकरण का विषय नहीं है, बल्कि यह शहरों की हवा को साफ करने और सार्वजनिक परिवहन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। एनसीआर क्षेत्र के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे प्रमुख शहरों को शुरुआती चरण में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इन शहरों में ई-बसों के संचालन के साथ चार्जिंग और डिपो का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की योजना है, ताकि इलेक्ट्रिक बसें केवल खरीदी न जाएं, बल्कि उनके नियमित संचालन के लिए आवश्यक पूरा ढांचा भी तैयार हो।

2030 तक 100 प्रतिशत स्वच्छ ईंधन आधारित बस बेड़े का लक्ष्य
हरियाणा राज्य परिवहन उपक्रम ने वर्ष 2030 तक अपने बस बेड़े को इलेक्ट्रिक अथवा अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन तकनीक में बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों के साथ भविष्य में हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक को भी शामिल किया जा सकता है। यह लक्ष्य पूरा होने के बाद सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता काफी कम होगी। इससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ शहरों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।

2026 में 925 नई ई-बसों के विस्तार की तैयारी
क्लीन एयर रणनीति के तहत प्रदेश के प्रमुख एनसीआर शहरों में 925 नई इलेक्ट्रिक बसें उतारने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें से 575 बसों के लिए ऑर्डर दिए जाने की जानकारी है। इस विस्तार से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे शहरों में सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ेगी। ई-बसों के बढ़ते बेड़े के साथ शहरों में निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक आकर्षक बनाने का भी प्रयास होगा।

11 जिला मुख्यालयों से ई-बस सेवा का विस्तार
ई-बस योजना को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। शुरुआती चरण में 11 जिला मुख्यालयों में भी इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा शुरू की जा रही है। भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, सिरसा और हांसी समेत चयनित शहरों में प्रारंभिक तौर पर 10-10 इलेक्ट्रिक सिटी बसें चलाने की योजना है। इससे छोटे और मध्यम शहरों में रहने वाले यात्रियों को भी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ मिलेगा। खास तौर पर दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ई-बस सेवा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

बस अड्डों पर बनेंगे आधुनिक चार्जिंग स्टेशन
ई-बसों के संचालन की सबसे बड़ी आवश्यकता चार्जिंग व्यवस्था है। सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए 11 जिलों के बस अड्डों के भीतर दो-दो प्रमुख इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है।
इसके अतिरिक्त दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर भी चार्जिंग हब विकसित किए जा रहे हैं। करनाल जैसे प्रमुख केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है जहां एक समय में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज किया जा सके।

10 प्रमुख जिलों में ई-बस डिपो पर काम
सरकार पहले चरण में 10 प्रमुख जिलों में आधुनिक ई-बस डिपो तैयार कर रही है। पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, हिसार, यमुनानगर और रेवाड़ी को इस चरण में शामिल किया गया है। इन डिपो में सामान्य बस अड्डों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत के अनुसार अलग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। चार्जिंग पॉइंट, बिजली आपूर्ति, बसों की पार्किंग और संचालन व्यवस्था को एकीकृत किया जाएगा। पंचकूला के सेक्टर-5 बस स्टैंड जैसे स्थानों पर भी चार्जिंग क्षमता बढ़ाने की योजना है। जहां पहले सीमित चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध थे, वहां नए डिपो के साथ हाई-पावर चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 25 से 100 किलोमीटर में चार्जिंग नेटवर्क
ई-बसों को केवल शहरों तक सीमित रखने के बजाय लंबी दूरी के मार्गों पर भी चलाने की तैयारी है। इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे भारी क्षमता वाले चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे प्रमुख कॉरिडोर पर लगभग 25 से 100 किलोमीटर के अंतराल में चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने की दिशा में योजना बनाई गई है। इससे लंबी दूरी की ई-बसों को बीच रास्ते चार्जिंग की समस्या से बचाने में मदद मिलेगी।

सरकारी जमीन पर चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ावा
राज्य में चार्जिंग ढांचे के विस्तार के लिए सरकारी विभागों की खाली जमीन और बस अड्डों का इस्तेमाल करने की नीति पर भी जोर दिया जा रहा है। परिवहन विभाग समेत 18 सरकारी विभागों को चार्जिंग पॉइंट लगाने के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे निजी जमीन पर निर्भरता कम होगी और सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा सकेगा।

विद्यार्थियों को ई-बसों में भी मुफ्त यात्रा का लाभ
ई-बस योजना का सीधा लाभ विद्यार्थियों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की घोषणा के अनुसार स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों के लिए हरियाणा रोडवेज का स्टूडेंट बस पास नई इलेक्ट्रिक बसों में भी मान्य रहेगा। विद्यार्थी अपना वैध बस पास दिखाकर ई-बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सस्ता परिवहन उपलब्ध होगा तथा परिवारों पर यात्रा का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में बड़ी राहत
हरियाणा सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कर संबंधी प्रोत्साहन भी दिए हैं। 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले नए इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों पर मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। महिलाओं के नाम पर खरीदे जाने वाले गैर-परिवहन वाहनों पर भी अतिरिक्त कर राहत दी गई है। वहीं, सीएनजी वाहनों पर पहले से जारी 20 प्रतिशत कर छूट को भी बरकरार रखा गया है।

पहली 1000 ई-बसों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन
ई-बसों की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए शुरुआती 1000 इलेक्ट्रिक बसों पर एक्स-शोरूम कीमत का 10 प्रतिशत इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा इन बसों पर हरियाणा मोटर वाहन कर में 75 प्रतिशत छूट तथा पंजीकरण के लिए केवल 500 रुपये की टोकन फीस का प्रावधान बताया गया है। हरियाणा के अधिकार क्षेत्र में आने वाले राज्यीय राजमार्गों पर इन बसों को राज्य टोल टैक्स में 100 प्रतिशत छूट भी दिए जाने की व्यवस्था है।

जीसीसी मॉडल से बढ़ेगी संचालन क्षमता
नई ई-बस व्यवस्था में सरकार ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल को प्राथमिकता दे रही है। इस मॉडल में निजी ऑपरेटर बसें उपलब्ध कराते हैं और सरकार उन्हें निर्धारित आधार पर प्रति किलोमीटर भुगतान करती है। इससे सरकार को एक साथ बड़ी संख्या में बसें खरीदने और उनके रखरखाव का पूरा खर्च उठाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही निजी क्षेत्र की तकनीकी और परिचालन क्षमता का उपयोग करके ई-बस सेवा का तेजी से विस्तार किया जा सकता है।

सुरक्षा और डिजिटल निगरानी पर भी जोर
नई ई-बसों में उन्नत जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली और पैनिक बटन जैसी सुरक्षा सुविधाएं अनिवार्य किए जाने की दिशा में प्रावधान हैं। बसों की निगरानी राज्य के एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से की जा सकेगी। इससे बसों की लोकेशन, संचालन और सुरक्षा पर नजर रखने में मदद मिलेगी। किसी आपात स्थिति में पैनिक बटन यात्रियों और चालक-परिचालक के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण साबित हो सकता है।

मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा
ई-बसों की खरीद में भारत सरकार के फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के मानकों का पालन करने वाली बसों को प्राथमिकता देने की नीति है। इससे देश में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय विनिर्माण और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। साथ ही पुरानी बैटरियों के निपटान के लिए रीसाइक्लिंग और मटेरियल रिकवरी की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि इलेक्ट्रिक परिवहन का विस्तार पर्यावरण के लिए नई समस्या न बने।

प्रदूषण नियंत्रण से लेकर यात्री सुविधा तक व्यापक असर
हरियाणा में ई-बसों का विस्तार केवल परिवहन क्षेत्र में बदलाव नहीं है। इसका असर पर्यावरण, शहरी यातायात, ऊर्जा खपत और आम यात्रियों की सुविधा पर भी पड़ेगा। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों से स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। परिवहन मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में सरकार का जोर अब ऐसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर है जो स्वच्छ होने के साथ-साथ सुरक्षित, तकनीकी रूप से आधुनिक और यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो।

2030 का लक्ष्य, आज से शुरू हो रही तैयारी
हरियाणा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा में इस व्यापक बदलाव को जमीन पर उतारने की है। ई-बसों की खरीद के साथ चार्जिंग स्टेशन, बिजली आपूर्ति, डिपो, रखरखाव, चालक-परिचालक प्रशिक्षण और बैटरी प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा। यदि योजना के अनुरूप काम आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में हरियाणा का सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह नई तस्वीर पेश कर सकता है। अनिल विज के नेतृत्व में परिवहन विभाग की ई-बस पहल प्रदेश के शहरों को प्रदूषण मुक्त और सार्वजनिक परिवहन को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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