सिरसा।।(सतीश बंसल)। एक प्राचीन कहावत है कि ‘पूत के पांव पालने में ही दिखाई दे जाते हंै’। अपार हिम्मत, हौंसला और दृढ़ निश्चय हो तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है गांव भंगू निवासी योगेश वर्मा पुत्र श्रीराम रिटायर्ड असिस्टेंट डीसी कार्यालय, सिरसा ने, जिन्होंने अपनी हिम्मत व हौंसले से अपने उस सपने को पंख लगाने का काम किया है, जोकि उसने अकेले में बैठकर बुना था। केवल योगेश ही नहीं, उसके परिजनों को भी उसकी मेहनत पर पूरा भरोसा था और योगेश के सपने को पूरा करने में उन्होंने हर संभव सहयोग किया। योगेश वर्मा ने अपने दृढ़ निश्चय से 14वें प्रयास में भारतीय सेना में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर अपना चयन करवाकर अभिभावकों के साथ-साथ गांव भंगू का भी नाम रोशन किया है। बेटे की सफलता पर परिवार के साथ-साथ गांव भंगू के ग्रामीण भी फूले नहीं समा रहे हंै।
योगेश वर्मा ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 2001 में सहीराम वर्मा के घर हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी सेंटेनरी स्कूल, सिरसा में हुई। हिंदु कॉलेज ऑफ यूनिवर्सिटी दिल्ली से बीएससी केमिस्ट्री में ग्रेजुएट की। इसके बाद एमएससी ज्योग्राफी पोस्ट ग्रेजुएट जारी है। यही नहीं अपनी मेहनत से उन्होंने यूजीसी नेट की परीक्षा भी 98.1 प्रतिशत अंकों के साथ उत्त्तीर्ण की। योगेश वर्मा ने बताया कि उसका शुरू से ही सपना था कि वह आर्मी में जाए। वह पिछले 5 सालों से लगातार प्रयास कर रहा था। आर्मी में चयन के लिए वह इससे पूर्व 13 बार सीडीएस व एनडीए की परीक्षा दे चुका था। सीडीएस की लिखित परीक्षा वह हर बार उत्त्तीर्ण कर देता था, लेकिन एसएसबी (साक्षात्कार) में रह जाता था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। एसएसबी की परीक्षा के लिए 19 से 24 साल आयु सीमा होती है और ये उसके लिए आखिरी अवसर था। 14वीं बार में 14वीं रेंक के साथ उसका सेना में बतौर लेफ्टिनेंट चयन हो गया। इसके साथ-साथ यूपीएससी में भी बतौर असिस्टेंट कमांडेंट (111वां रेंक) के साथ उसका चयन हो गया, लेकिन उसका सपना आर्मी पेरा स्पेशल फोर्स में जाने का है।