नई दिल्ली वैश्विक उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया है। इस बीच राजनीतिक नेताओं और विदेशी मामलों के जानकारों की बयानबाजी तेज हो गई है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने पर विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी (रिटायर्ड) ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "कहीं भी कोई बड़ा विरोध नहीं दिखा, जिससे पता चलता है कि यह पहले से प्लान किया गया ऑपरेशन था। अमेरिका के पास वेनेजुएला के काराकास में पहले से ही समर्थक मौजूद थे, जो अपहरण को आसान बनाने में मदद कर रहे थे। एंटोनियो के खिलाफ कारण यह था कि वह एक लोकप्रिय नेता नहीं थे, उन्होंने धोखाधड़ी से चुनाव जीता था।"
प्रफुल्ल बख्शी ने कहा, "अमेरिका ने क्या किया? उन्होंने एक लिमिटेड ऑपरेशन किया। उन्होंने हेलीकॉप्टर का उपयोग किया। जब भी कोई हमला होता है, तो हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल उन जगहों पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता जहां एयर डिफेंस बहुत अलर्ट हो। लेकिन यह हैरानी की बात है कि वेनेजुएला के एयर डिफेंस, इंटरसेप्टर, फाइटर, उनके पास सभी इक्विपमेंट हैं। उन्होंने उनका इस्तेमाल नहीं किया, हालांकि वेनेजुएला के पास छोटा एयर डिफेंस सिस्टम है, लेकिन उनके पास यह है। उन्होंने अमेरिकी हमलों के खिलाफ उसका इस्तेमाल नहीं किया।"
उन्होंने कहा, "अमेरिका ने वेनेजुएला के मिलिट्री ठिकानों पर हमले किए। उन्होंने उनके राष्ट्रपति एंटोनियो और उनकी पत्नी को भी किडनैप कर लिया। वजह यह बताई गई कि वे कथित तौर पर ड्रग्स की डीलिंग वगैरह में शामिल थे, लेकिन सही जानकारी कभी पूरी तरह से सामने नहीं आती है।"
डिफेंस एक्सपर्ट कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने कहा, "अमेरिका ने वही किया है जो वह दूसरे विश्व युद्ध के बाद से करता आ रहा है। यह लगभग सत्ता परिवर्तन है, अगर मैं गलत नहीं हूं, तो यह 70वां या 71वां देश है जहां सत्ता परिवर्तन हुआ है। वेनेजुएला से पहले बांग्लादेश था, और उससे पहले यूक्रेन था।"
रिटायर्ड कर्नल डीएस चीमा ने कहा कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ना रणनीतिक और संसाधन-आधारित मकसद को दिखाता है। वेनेजुएला सैन्य रूप से अमेरिका का सामना नहीं कर सकता।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, "मारिया ने वेनेजुएला में लोकतंत्र के लिए बहुत मेहनत की और लड़ाई लड़ी, इसलिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। जिस संघर्ष के लिए उन्होंने वहां लड़ाई लड़ी, वही लड़ाई राहुल गांधी भारत में लड़ रहे हैं।"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "हां, लेकिन हम वेनेजुएला से ज्यादा तेल नहीं खरीद रहे हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसका हम पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। हालांकि, ये सब ट्रंप प्रशासन के तहत हो रहे नए डेवलपमेंट्स का हिस्सा हैं, जिनके बारे में बाकी दुनिया को पता होना चाहिए, उन पर रिएक्शन देना चाहिए, और अगर जरूरी हो तो कोई दूसरा सॉल्यूशन निकालना चाहिए, जिसके लिए हम अभी 2 अप्रैल की डेडलाइन के लिए कोशिश कर रहे हैं।"