शाहजहांपुर (सुशील कुमार): राजीव गाँधी वे नेता थे जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने देश की दिशा बदल दी। उन्होंने 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को एक नई दिशा दी। उनके इस प्रयास ने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया, विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया और समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाया।
यह बात वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक मेहता ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी जी का विश्वास था कि लोकतंत्र को गाँव तक पहुँचना चाहिए, जहाँ हर नागरिक की आवाज़ सुनी जा सके। पंचायती राज संस्थाएँ उनके इस दृष्टिकोण की आधारशिला बनीं, जिससे स्थानीय स्वशासन, सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण संभव हुआ।
73वें संशोधन ने नियमित चुनावों, वंचित समुदायों के लिए आरक्षण और पंचायती राज संस्थाओं को शक्तियों के हस्तांतरण को अनिवार्य बनाया। इस ऐतिहासिक कदम ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की।
उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी जी की विरासत हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करती है। पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाकर, हम ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सभी के लिए एक उज्ज्वल भविष्य बनाने के उनके संकल्प को साकार कर सकते हैं।
वह महान दूरदर्शी नेता थे। देश के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 18 वर्ष के युवाओं को लोकतंत्र का सबसे बड़ा अधिकार दिया। वह सूचना क्रांति के आधार हैं। पंचायतीराज व्यवस्था से लोकतांत्रिक व्यवस्था को निचले स्तर पर सशक्त बनाने का श्रेय उनको जाता है। अपनी बहुमुखी प्रतिभा के रहते भारत को चौथी दुनिया के रूप में स्थापित करने का सपना देखा।
उन्होंने कहा कि गांधी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया। राजीव गांधी एक महान दूरदर्शी नेता थे। उनके द्वारा शुरू की गई कई नीतियों का आज भी पालन किया जा रहा है। अगर वह आज जीवित होते, तो देश के लिए एक बड़ी धरोहर होते। राजीव गांधी ही वह नेता हैं जिनकी आज भारत को ज़रूरत है। भले ही मोदी डिजिटल इंडिया का श्रेय लेते हों, लेकिन राजीव गांधी की ही वजह से आज हम डिजिटल इंडिया की बात कर पा रहे हैं। वे ही आईटी क्रांति लाने वाले व्यक्ति थे।
मेहता ने कहा कि राजीव गांधी ने दूरसंचार क्रांति और कंप्यूटर युग लाकर आधुनिक भारत की नींव रखी। लेकिन उनके लिए जो बात सबसे अलग है, वह है पूर्व प्रधानमंत्री की पंचायती राज व्यवस्था, जिसके बारे में उनका कहना है कि इसने "गांवों के लोगों को विकास की शक्ति और आशा दी