लखनऊ: फॉल्ट ठीक करने में लगने वाला समय बढ़ने से हुए बिजली संकट को देखते हुए अब बिजली कंपनियां संविदा कर्मचारियों की भर्ती करेंगी। जोनवार जरूरत का आकलन करके कुशल और अर्धकुशल संविदा कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यूपी में बिजली संकट के बीच बड़ा फैसला, संविदा कर्मचारियों की फिर होगी भर्ती . यूपी में फॉल्ट ठीक करने में लगने वाला समय बढ़ने से हुए बिजली संकट को देखते हुए अब बिजली कंपनियां संविदा कर्मचारियों की भर्ती करेंगी। जोनवार जरूरत का आकलन करके कुशल और अर्धकुशल संविदा कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गर्मियों के पहले तकरीबन 20 हजार संविदा कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई थी।
इससे गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं को बड़ा बिजली संकट झेलना पड़ रहा है। किसी भी जगह पर होने वाले फॉल्ट पर उसे बनाने में तय समय से ज्यादा लग रहा था, क्योंकि उपकेंद्रों पर मरम्मत का काम देखने वाली टीम की संख्या केवल एक कर दी गई थी। वह भी तब जबकि एक उपकेंद्र पर सात-आठ फीडर तक होते हैं। इस वजह से एक साथ एक से अधिक फीडर में खराबी आने की वजह से बारी-बारी से उन्हें ठीक किया जा रहा था। इससे फॉल्ट ठीक होने में समय लग रहा था और फॉल्ट ठीक होने तक जनता गर्मी में बिना बत्ती के परेशान हो रही थी।
बीते कई दिनों में कई बार इस मसले पर सवाल उठने के बाद आखिरकार जरूरत के मुताबिक भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने जेम पोर्टल से कुशल और अर्धकुशल संविदा कर्मचारियों की भर्ती के लिए निविदा निकालकर इसमें हिस्सा लेने वाली कंपनियों के प्रपत्रों की जांच शुरू कर दी है। इसी तरह से अन्य बिजली कंपनियां भी इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
अपीलीय अधिकरण के आदेशों से 10% अधिभार
उधर, पावर कॉरपोरेशन ने शनिवार को 10% अधिभार शुल्क के संबंध में कहा कि अपीलीय अधिकरण के आदेशों के अनुपालन में ऐसा हुआ है। इनमें एनटीपीसी को राख परिवहन मद में देय एरियर और केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (सीटीयू) को पूर्व वर्षों के लंबित देयों का भुगतान शामिल है। इस वजह से विद्युत क्रय लागत में अस्थाई बढ़ोतरी हुई है। पावर कॉरपोरेशन ने कहा है कि बीते छह साल से यूपी की बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
अधिभार नियामक आयोग की व्यवस्था के मुताबिक वसूला जा रहा है। हर महीने के लिए इसकी दरें परिवर्तित होती रहती हैं। इनकी गणना आयोग द्वारा अनुमोदित लागत और वास्तविक लागत के अंतर से तय होती है। कई बार यह ऋणात्मक भी रहती है। फरवरी-2026 में दर 10 थी, जबकि माह मार्च में ऋणात्मक (-2.42 प्रतिशत) हो गई थी।
महंगी बिजली खरीद की जांच हो : परिषद
उपभोक्ता परिषद ने महंगी दरों पर हुई बिजली खरीद के जांच की मांग की है। नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में वास्तविक विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित की गई थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने मार्च 2026 में लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद की। इससे उपभोक्ताओं पर 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। इस महंगी बिजली खरीद की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी में नियामक आयोग में याचिका दाखिल करके ईंधन अधिभार शुल्क मामले के जांच की मांग की गई थी। उस मामले में अब तक नियामक आयोग ने कोई पहल नहीं की है और