चंडीगढ़ : सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि मानसून की शुरुआती बारिश ने ही हरियाणा सरकार के पूर्व तैयारियों संबंधी दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष संबंधित विभागों को 30 जून तक सड़कों के दोनों ओर बने खालों की सफाई, नालों की गाद निकालने, नदियों एवं ड्रेनों के तटबंधों को मजबूत करने तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन इस बार भी इन कार्यों में गंभीर लापरवाही बरती गई। कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में आज भी सूखे जैसे हालात हैं और लोगों को पीने के पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, मामूली बारिश के बाद अनेक शहरों और गांवों में जलभराव तथा बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने मानसून से पहले आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं कीं।
सांसद ने कहा कि यदि नालों, खालों और जल निकासी मार्गों की समय पर सफाई की जाती, अतिक्रमण हटाए जाते तथा तटबंधों की मरम्मत और मजबूती सुनिश्चित की जाती, तो लोगों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। हर वर्ष करोड़ों रुपये मानसून पूर्व तैयारियों के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर उसका अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देता।
कुमारी सैलजा ने कहा कि जलभराव के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, किसानों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, यातायात बाधित हो रहा है और लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, वहां किसान सिंचाई और पेयजल संकट को लेकर चिंतित हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार को केवल घोषणाओं और कागजी दावों तक सीमित रहने के बजाय प्रभावी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। मानसून जैसी वार्षिक और पूर्वानुमानित स्थिति के लिए पहले से ठोस तैयारी करना सरकार की जिम्मेदारी है। कुमारी सैलजा ने मांग की कि प्रदेशभर में मानसून पूर्व तैयारियों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए, जिन क्षेत्रों में सफाई और मरम्मत कार्य अधूरे हैं उन्हें तत्काल पूरा किया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
सांसद ने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े ऐसे मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और लोगों को राहत दिलाने के लिए हर स्तर पर आवाज बुलंद करेगी। सांसद कुमारी सैलजा ने येल विश्वविद्यालय के 2026 पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ई पी आई) में भारत की 177 देशों में 176वीं रैंक पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसे राजनीति के बजाय आत्ममंथन और सुधार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए ठोस नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन की आवश्यकता है। कुमारी सैलजा ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण, दूषित जल स्रोत, घटते हरित क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ देश की वैश्विक रैंकिंग और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हो।