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राष्ट्रीय

बेसहारा बेटियों का सहारा बनी योगी सरकार, 66 बेटियों की शादी कराकर निभाई अभिभावक की जिम्मेदारी

29 अप्रैल, 2026 08:15 PM

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है।

बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई
दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके।

वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ
इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।

हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ
कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें।

कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था
योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है।

बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को
योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है।

योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें
महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

 

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