चंडीगढ़ : पंजाब कांग्रेस इंचार्ज भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी गुट के नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई मीटिंग के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात पर शुरू हो गई है कि मीटिंग के अंदर जो कुछ कहा गया वह कैमरों के सामने क्यों नहीं दोहराया गया। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग के दौरान कई सीनियर नेताओं ने पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कारगुजारी पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने ये राय दी कि जाब कांग्रेस को मजबूत करना है तो प्रधानगी में बदलाव पर विचार होना चाहिए। हाईकमान को पहले लिए गए फैसले की समीक्षा करने की बात भी चर्चा में आई बताई जा रही है पर जैसे ही मीटिंग खत्म हुई और नेता मीडिया के सामने आए तो तस्वीर बदली हुई नजर आई। किसी भी नेता ने खुलकर राजा वड़िंग का नाम लेकर उन्हें हटाने की मांग नहीं की। ज्यादातर ने यही कहा कि उन्होंने अपना पक्ष पार्टी इंचार्ज के सामने रख दिया है और अब आखिरी फैसला हाईकमान को करना है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक और दिलचस्प पक्ष भी सामने आया। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में मौजूद कुछ नेताओं ने ऑफ द रिकार्ड पत्रकारों से अंदर हुई चर्चा के कई विवरण सांझा किए। किस नेता ने क्या कहा, किसने लीडरशिप बदलने की बात की और किसने गुटबाजी का मुद्दा उठाया, यह जानकारियां बाहर आ गई पर जब कैमरे चालू हुए तो वही नेता जनतक तौर पर संतुलित बयान देते नजर आए। इस रवैये ने कई सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं। मीटिंग में इतनी तीखी नाराजगी थी, तो वही रुख जनतक तौर पर क्यों नहीं अपनाया गया? क्या ये पार्टी अनुशासन का पालन था, हाईकमान के फैसले का इंतजार या फिर अंदरूनी मतभेदों को खुले टकराव में बदलने से बचने की रणनीति?
सियासी माहिरों का मानना है कि नेताओं ने अपना संदेश भूपेश बघेल तक तो साफ तौर पर पहुंचा दिया पर जनतक मंच पर पार्टी की एकता का प्रभाव बनाए रखने के लिए संभला हुआ रुख अपनाया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक जानकारी यह भी दर्शाती है कि पंजाब कांग्रेस के अंदर लीडरशिप को लेकर अभी भी असहमति है। फिलहाल सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बघेल अपनी रिपोर्ट में मीटिंग के दौरान उठाए गए सभी मुद्दों को किस रूप से हाईकमान के सामने रखते हैं और क्या इसके बाद पंजाब कांग्रेस की लीडरशिप को लेकर कोई नया फैसला सामने आता है या नहीं।