Sunday, July 12, 2026
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गुरुग्राम में 'टॉवर ऑफ जस्टिस' का लोकार्पण, मुख्य न्यायाधीश बोले- आधुनिक न्यायिक ढांचा न्याय तक पहुंच करेगा आसान

12 जुलाई, 2026 07:51 PM

चंडीगढ़ : भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण न्यायिक परिसर का निर्माण हरियाणा सरकार की संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार की सक्रिय सहयोगिता के फलस्वरूप हरियाणा में न्यायिक परिसर का ढांचागत विकास सुदृढ हो रहा है और टॉवर ऑफ जस्टिस जैसे न्यायिक भवन न्याय प्रक्रिया को सौहार्दपूर्ण वातावरण देने में सहभागी बनेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत रविवार को गुरुग्राम में टॉवर ऑफ जस्टिस के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, जस्टिस विक्रम नाथ, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा, जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी, अध्यक्ष बिल्डिंग कमेटी, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक सिब्बल व जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की गरिमामयी उपस्थिति में 'टावर ऑफ जस्टिस' न्यायिक परिसर का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने गुरुग्राम लोकार्पण समारोह से ही वर्चुअल माध्यम से नूंह जिला के तावडू व पुन्हाना न्यायिक परिसर का शिलान्यास भी किया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित अन्य गणमान्य ने टॉवर ऑफ जस्टिस निर्माण में अपना योगदान देने वाले श्रमिकों को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका सम्मान किया।


न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आज का अवसर मेरे लिए विशेष है। जनवरी 2017 में, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए, मुझे इस न्यायिक परिसर का भूमि-पूजन करने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम, जो कभी मुख्यतः कृषि के लिए जाना जाता था, वह आज उ‌द्योग, नवाचार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आज फार्च्यून 500 की आधे से अधिक कंपनियों के क्षेत्रीय कार्यालय, 1500 से अधिक भारतीय कंपनियाँ और स्टार्ट-अप्स यहाँ कार्यरत हैं। व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ संपत्ति, तकनीक, अनुबंध और रोजगार से जुड़े विवाद भी बढ़े हैं। आज गुरुग्राम की अदालतों में 24,000 से अधिक सिविल डिस्प्यूट , लगभग 1,000 कमर्शियल डिस्प्यूट तथा नेगोशियबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं। ये आँकड़े न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दायित्व का संकेत हैं। ऐसे समय में यह टॉवर ऑफ जस्टिस केवल एक आधुनिक भवन नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुँच को और अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है। न्यायालयों का वास्तविक महत्व उनकी भव्यता में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वे नागरिक और न्याय के बीच की दूरी को कितना कम करते हैं। यह परिसर उसी सोच का प्रतीक है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण के माध्यम से अधिक मामलों की सुनवाई संभव होगी, लंबित मामलों के निस्तारण में गति आएगी और विशेष रूप से कमर्शियल डिस्प्यूट तथा नेगोशियबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट से जुड़े मामलों के लिए अधिक न्यायिक क्षमता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता सदैव ऐसी न्याय व्यवस्था का निर्माण होनी चाहिए जो दक्ष भी हो और निष्पक्ष भी। न्याय में गति आवश्यक है, परन्तु वह कभी भी संवैधानिक मूल्यों की कीमत पर प्राप्त नहीं की जा सकती। इस परिसर में आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा सुव्यवस्थित ज्यूडिशियल मालखाना जैसी सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं। इस परियोजना की एक अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित इंटरनेशनल आर्बिटेशन सेंटर है जो उच्च न्यायालय के संरक्षण में संचालित होगा।


उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी न्यायपालिका का निर्माण है जो आधुनिक हो, किन्तु मानवीय भी हो, तकनीकी रूप से उन्नत हो, किन्तु संविधान के मूल्यों में दृढ़ता से निहित भी और प्रत्येक वाद के पीछे छिपे मानवीय जीवन को समझने वाली संवेदनशील संस्था भी बनी रहे। उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य मामलों का शीघ्र निस्तारण करना तो है ही उसके साथ, हमारा प्रयास यह भी होना चाहिए कि कोई भी नागरिक आर्थिक, सामाजिक अथवा प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण स्वयं को न्याय से वंचित न महसूस करे। उन्होंने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस केवल एक भव्य इमारत न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए निष्पक्ष, प्रभावी और संवेदनशील न्याय का प्रतीक बनेगा।


संविधान की मर्यादा का केंद्र है टॉवर ऑफ जस्टिस : मुख्यमंत्री
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में निर्मित अत्याधुनिक 'टावर ऑफ जस्टिस' न्यायिक परिसर संविधान की मर्यादा, न्यायपालिका की गरिमा और नागरिकों के न्याय पर अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित, सुलभ एवं पारदर्शी न्याय व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक परिसर की स्थापना न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जिस भवन की आधारशिला रखी गई थी, उसका लोकार्पण आज भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के कर कमलों से होना एक प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक संयोग है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ जस्टिस' को भी समान महत्व देना होगा। न्याय व्यवस्था ऐसी हो जो सरल, सुलभ, पारदर्शी तथा समयबद्ध हो, ताकि प्रत्येक नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके और आर्थिक विकास को मजबूत कानूनका उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय न्याय परंपरा का मूल आधार निष्पक्षता, धर्म और सिद्धांत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर स्थापित यह न्यायिक परिसर आने वाले वर्षों में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने टॉवर ऑफ जस्टिस का जिक्र करते हुए कहा कि दो टावरों में विकसित यह परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल है। पुराने परिसर की 45 अदालतों की तुलना में यहां 55 आधुनिक अदालत कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में बैंक, डाकघर, बार लाइब्रेरी, मध्यस्थता केंद्र तथा अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली अधिक दक्ष, प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पुराने न्यायालय परिसर के एक हिस्से को अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर्स के निर्माण हेतु समर्पित किया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर और पर्याप्त कार्यस्थल की सुविधा उपलब्ध हो सके।


आधुनिक न्यायिक अधोसंरचना से आमजन का न्याय पर विश्वास होगा और मजबूत : मनोहर लाल
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस का उद्घाटन केवल एक नए भवन का शुभारंभ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन के विश्वास को और सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ न्याय की उम्मीद लेकर आता है। ऐसे में न्यायालय का वातावरण, वहां उपलब्ध सुविधाएं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक अनुभव नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में बढ़ते मुकदमों को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल न्यायिक परिसर की आवश्यकता थी। इस परिसर में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाएंगी।


उन्होंने कहा कि यह भवन केवल आधुनिक अधोसंरचना का उदाहरण नहीं, बल्कि न्याय को अधिक सम्मानजनक और सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आज सबसे अधिक विवाद भूमि, पारिवारिक और अन्य सामाजिक मामलों से जुड़े हैं, जिससे न्यायालयों पर लगातार भार बढ़ रहा है। ऐसे में केवल न्यायालयों का विस्तार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनावश्यक मुकदमों को कम करने, वैकल्पिक विवाद समाधान, मध्यस्थता और लोक अदालतों जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रशासन में पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और नागरिक हितों को केंद्र में रखकर अनेक सुधार किए हैं, फिर भी यदि न्यायालयों के निर्णयों से नीतियों में सुधार की आवश्यकता सामने आती है तो सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करेगी। उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और अधिवक्ता समुदाय से समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि न्याय सुलभ, किफायती और समयबद्ध होना चाहिए। इससे आम नागरिक का न्यायपालिका पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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