केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है। इस बार पेट्रोल 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की नई कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
यह दूसरी बढ़ोतरी है
इससे पहले शुक्रवार, 15 मई को भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। उस समय पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे, जबकि सीएनजी की कीमत में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाओं समेत राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली थी।
भाजपा नेताओं ने फैसले का बचाव करते हुए वैश्विक तुलना पेश की। पार्टी के आईटी प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहा।
उन्होंने आंकड़ों के साथ दावा किया कि:
– अमेरिका में पेट्रोल 44.5% और डीजल 48.1% महंगा हुआ
– पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9% महंगा हुआ
– ब्रिटेन में पेट्रोल 19.2% और डीजल 34.2% महंगा हुआ
– भारत में यह वृद्धि सबसे कम रही — पेट्रोल में मात्र 3.2% और डीजल में 3.4%
सरकार और भाजपा का तर्क है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत आम नागरिकों पर बोझ सबसे कम रखने में सफल रहा है। यह लगातार दूसरी बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का नया दौर ला सकती है, खासकर परिवहन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों पर इसका असर पड़ने की आशंका है।
वहीं कीमतों में इस लगातार इजाफे पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने पहले कमर्शियल एलपीजी और अब पेट्रोल-डीजल महंगे कर दिए हैं। उन्होंने इसे पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों से जोड़ते हुए महंगाई बढ़ने का खतरा बताया।