कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से देश में पेट्रोल 18 रुपए और डीजल 35 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। इससे कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं। कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए का घाटा हो रहा है। पिछले महीने के पीक पर देश की तीनों बड़ी तेल कंपनियां हर दिन करीब 2,400 करोड़ का नुकसान झेल रही थीं। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद यह घाटा घटकर 1,600 करोड़ रह गया है।
हर 10 डालर के उछाल से नुकसान करीब छह रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है। सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22 फीसदी था, जो अब घटकर सिर्फ आठ फीसदी रह गया है। अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
अमरीका सहित कई देशों ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम
अमरीका में पेट्रोल की औसत कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार चार डालर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका सहित कई पड़ोसी देशों ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 45 फीसदी मिडल ईस्ट और 35 फीसदी रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढक़र 20 अरब डालर तक पहुंच सकता है।