नई दिल्ली। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि उनकी सेना वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठाकर अमरीका ले आई है तो यह महज फौरी तौर पर लिया गया फैसला भर नहीं है। इसकी जड़ में इन दोनों देशों के रिश्तों में ढाई दशक से चली आ रही कड़वाहट और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका के प्रभुत्व कायम करने की लालसा है। दरअसल अमरीका और वेनेजुएला के बीच अविश्वास और तनाव की जड़ें तब से है, जब 1999 में वहां वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने सत्ता संभाली। वहीं यह भी एक तथ्य है कि वेनेजुएला को सबसे पहले स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता भी अमरीका ने ही 1835 में दी थी। यहां वेनेजुएला और अमरीका के बीच बिगड़ते रिश्तों की टाइमलाइन दी गयी है कि और कैसे इस दक्षिण अमेरिकी देश और अमरीका के रवैये ने इस स्थिति को जन्म दिया है।
• 1999 : ह्यूगो शावेज ने सत्ता में आने के बाद ‘बोलिवेरियन क्रांति’ शुरू की और अमेरिका को ‘साम्राज्यवादी’ बताया।
• 2002 : वेनेजुएला ने अमेरिका पर शावेज के खिलाफ विफल सैन्य तख्तापलट का समर्थन करने का आरोप लगाया।
• 2007 : शावेज ने तेल क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ।
• 2013: मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद आर्थिक बदहाली और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कई प्रतिबंध लगाये।
• 2019 : अमरीका ने मादुरो के पुनर्चुनाव को अवैध घोषित कर विपक्षी नेता जुआन गुआइडो को ‘अंतरिम राष्ट्रपति’ के रूप में मान्यता दी।
• 2025: अमरीका ने नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के नाम पर कैरिबियन क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती की।
• 2025 : अमरीकी विदेश विभाग ने 2019 में मादुरो पर 15 मिलियन डॉलर (करीब 135 करोड़ रुपए) का इनाम रखा था, इनाम की राशि अगस्त 2025 में बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर (करीब 450 करोड़ रुपए) कर दी थी।
• 2026 : अमरीकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए।