नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध के तेरहवें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इस जंग में अमेरिका की जीत हो चुकी है। केंटकी राज्य में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा कि युद्ध के पहले ही घंटे में यह साफ हो गया था कि अमेरिकी सेना की ताकत के आगे ईरान टिक नहीं पाएगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य प्रहारों ने ईरान की सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है और उसे काफी कमजोर कर दिया है। हालांकि राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मिशन पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता तब तक लड़ाई जारी रहेगी।
युद्ध के आर्थिक मोर्चे पर अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संसद को चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ चल रहे युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका करीब ग्यारह अरब डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। इस भारी भरकम राशि में से लगभग पैंतालीस हजार करोड़ रुपये केवल हथियार और गोला बारूद की आपूर्ति पर खर्च हुए हैं। इन आंकड़ों ने अमेरिकी संसद में युद्ध के बढ़ते वित्तीय बोझ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने युद्ध विराम और शांति बहाली के लिए अपनी वैश्विक शर्तें रख दी हैं। ईरान ने शांति के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं जिनमें ईरान के कानूनी अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देना युद्ध में हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई करना और भविष्य में कभी हमला न होने की पुख्ता अंतरराष्ट्रीय गारंटी शामिल है। ईरान के इस रुख के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और उसके सहयोगियों के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे इन शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार होंगे या युद्ध और लंबा खिंचेगा।