सिरसा। (सतीश बंसल)पिछले कुछ सप्ताहों में कई बार बारिश होने के कारण वातावरण में अत्याधिक नमी बनी हुई है, जो हरा तेला व झुलसा रोग के पनपने में सहायक है। सर्वे में पाया गया कि ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में ग्वार की फसल में हरा तेला व झुलसा रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। यह जानकारी एचएयू हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. आरके सैनी ने दी। वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्ज भिवानी के सौजन्य से खण्ड बड़ागुढ़ा के गांव कर्मगढ़ में आयोजित कपास व ग्वार दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहे थे। डा. सैनी ने बताया कि इन दोनों समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में 3-4 पाऊच स्ट्रेप्टोसाइक्लिन तथा 250 मिली मैलाथियान अथवा रोगोर मिला कर स्प्रे करें। उन्होंने चित्रों की मदद से विभिन्न कीटों व बिमारियों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कृषि विभाग से पधारे कृषि विकास अधिकारी डा. गोविन्द ने नरमा की गुलाबी सुण्डी की रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाणित किए गए बीजों से ही बिजाई करें। बीटीएम संदीप कुमार ने गुलाबी सुण्डी के पतंगों पर नजर रखने के लिए फीरोमोन ट्रैप्स का प्रयोग करने की सलाह दी। इस अवसर पर अन्य कृषि अधिकारी एटीएम सुधीर कुमार, एटीएम पुनीत व सुपरवाईजर अमन ने भी अपने विचार रखे। शिविर में किसानों को नरमा व ग्वार से संबंधित पाठ्य सामग्री वितरित की गई तथा ग्वार के झुलसा रोग की रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के पाऊच भी बांटे गए। इस आयोजन में सरपंच प्रतिनिधि रोहताश के अलावा 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया।