नई दिल्ली(एजेंसी) : हम अपने घर और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह की सावधानियां बरतते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजमर्रा की कुछ चीजों में भी जहरीला पदार्थ छिपा हो सकता है? दीवारों पर लगा पुराना पेंट, खिलौने, कॉस्मेटिक्स, गहने और कुछ बर्तन लेड यानी सीसा के संपर्क में आने का कारण बन सकते हैं। शरीर में पहुंचने वाला लेड सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और बच्चों के लिए इसका खतरा विशेष रूप से अधिक होता है।
रोजमर्रा की चीजों से हो सकता है संपर्क
लेड एक जहरीली धातु है, जिसका इस्तेमाल अतीत में कई तरह के उत्पादों में किया जाता था। आज भी कुछ उत्पादों और पर्यावरणीय स्रोतों से इसके संपर्क में आने का खतरा बना हुआ है। पुराने या खराब हो रहे पेंट से निकलने वाली धूल, दूषित मिट्टी और पानी, कुछ सिरेमिक बर्तन, असुरक्षित या नकली गहने, कॉस्मेटिक्स और खिलौने इसके संभावित स्रोत हो सकते हैं। कुछ मसालों और पारंपरिक दवाओं में मिलावट या संदूषण के कारण भी लेड पाया जा सकता है।
बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक
लेड का असर हर उम्र के व्यक्ति की सेहत पर पड़ सकता है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है। बच्चों का मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है। ऐसे में लेड के संपर्क में आने से उनके मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। लंबे समय तक कम स्तर पर संपर्क भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
हाथों के जरिए शरीर में पहुंच सकता है लेड
बच्चे अक्सर जमीन पर खेलते हैं, अलग-अलग चीजों को छूते हैं और फिर उन्हीं हाथों को मुंह में डाल लेते हैं। यदि आसपास लेड से दूषित धूल या मिट्टी मौजूद है, तो इस तरह लेड शरीर में पहुंच सकता है। गर्भावस्था के दौरान लेड का संपर्क मां और गर्भस्थ शिशु के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।
वयस्कों की सेहत पर भी असर
लेड का खतरा केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से वयस्कों में किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। चिंता की बात यह है कि लेड के संपर्क में आने पर हमेशा तुरंत स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में लंबे समय तक संपर्क के बाद होने वाले नुकसान का पता देर से चल सकता है।
जागरूकता से बचाव पर जोर
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य संस्थाएं लेड के संपर्क को कम करने और इसके स्रोतों की पहचान करने पर जोर देती हैं। लेड पॉइजनिंग की रोकथाम के लिए घर, स्कूल और कार्यस्थल पर संभावित स्रोतों की पहचान करना और उनसे संपर्क को रोकना महत्वपूर्ण है।
घर में इन सावधानियों का रखें ध्यान
घर में धूल को नियमित रूप से साफ करें और सफाई के लिए गीले कपड़े या पोछे का इस्तेमाल करें। पुराने पेंट को खुद खुरचने से बचें, क्योंकि इससे लेड युक्त धूल फैल सकती है। बच्चों को टूटे-फूटे या बिना सुरक्षा मानकों वाले खिलौनों से दूर रखें। पीने के पानी के दूषित होने की आशंका हो तो उसकी जांच करवाएं। कॉस्मेटिक्स, बर्तनों, खिलौनों और अन्य उत्पादों को खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखें।