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राष्ट्रीय

एनआईसीडीसी की कार्यशाला में भव्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत मंथन

30 मई, 2026 01:39 PM

एनआईसीडीसी (राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम) द्वारा भव्य योजना और एनटीएच-बीआईएस परीक्षण अवसंरचना को लेकर शुक्रवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान योजना के कार्यान्वयन ढांचे को सुदृढ़ बनाने, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और समयबद्ध औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

कार्यान्वयन ढांचे को मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला में भव्य योजना के कार्यान्वयन ढांचे को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक परियोजनाओं में सरलता (ease of doing business) और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाए, ताकि उद्योग निर्धारित समय सीमा के भीतर उत्पादन शुरू कर सकें।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निवेश-तैयार परियोजनाओं की दिशा में मार्गदर्शन
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे प्रस्ताव तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो दीर्घकालिक औद्योगिक व्यवहार्यता और निवेश संभावनाओं पर आधारित हों। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे औद्योगिक पार्क विकसित करना है, जहां तैयार बुनियादी ढांचे के माध्यम से निवेश, उत्पादन, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को गति मिले।

त्वरित औद्योगिक विकास पर नीति का फोकस
DPIIT की संयुक्त सचिव गुरनीत तेज ने कहा कि यह योजना तत्काल संचालन क्षमता और निवेश तैयारियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे विशेष औद्योगिक क्षेत्रों की पहचान करें, निवेशकों से समानांतर संवाद स्थापित करें और उद्योग-विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप बुनियादी ढांचे की योजना बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय संसाधनों, कनेक्टिविटी लाभों और मौजूदा औद्योगिक ढांचे का अधिकतम उपयोग करते हुए लचीले मॉडल पर औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने चाहिए।

भव्य योजना की विस्तृत प्रस्तुति
NICDC के सीईओ एवं एमडी रजत कुमार सैनी ने भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें पात्रता मानदंड, चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया, वित्तीय ढांचा, निगरानी प्रणाली, समय-सीमा, मूल्यांकन मानक और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे प्रमुख बिंदु शामिल थे। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे इन दिशानिर्देशों का अध्ययन कर अपने सुझाव और इनपुट साझा करें, ताकि योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

डीपीआर और पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वयन पर जोर
एक अन्य प्रस्तुति में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया, भूमि चयन, बुनियादी ढांचे की योजना, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और दस्तावेजीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही भव्य पोर्टल का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परियोजना संबंधी जानकारी समय पर अपलोड करने का अनुरोध किया गया।

33,660 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना
भव्य योजना भारत सरकार द्वारा 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसके परिचालन दिशानिर्देश 23 मई 2026 को जारी किए गए। इस योजना का कुल परिव्यय 33,660 करोड़ रुपए है और इसका लक्ष्य देशभर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करना है। इस योजना के तहत तैयार बुनियादी ढांचा, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्मार्ट सेवाएं, लॉजिस्टिक्स सुविधा और निवेशक-अनुकूल वातावरण विकसित करने पर जोर दिया गया है।

समावेशी विकास मॉडल और निजी क्षेत्र की भागीदारी
भव्य योजना में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य औद्योगिक ढांचे को तेज गति से विकसित करना और निजी क्षेत्र की दक्षता एवं निवेश क्षमता का लाभ लेना है।

औद्योगिक गलियारों के अनुभव से मजबूत कार्यान्वयन
एनआईसीडीसी ने अपने औद्योगिक गलियारा विकास अनुभव के आधार पर इस योजना के क्रियान्वयन को समर्थन देने की बात कही है। धोलेरा, AURIC, विक्रम उद्योगपुरी और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक शहरों के अनुभवों से सीख लेकर बेहतर मास्टर प्लानिंग और निवेश सुविधा तंत्र विकसित किया जाएगा। कार्यशाला के अंत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मजबूत प्रस्ताव तैयार करने, संस्थागत तंत्र विकसित करने और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

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