चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला एक संक्षिप्त नाम आज चार महाद्वीपों तक फैले एक महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल समूह का रूप ले चुका है। चार देशों के बीच संवाद से शुरू हुई BRICS की यात्रा अब एक व्यापक और विविध समूह तक पहुंच गई है, जिसमें तेल-समृद्ध देश, अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं और दक्षिण-पूर्व एशिया के साझेदार शामिल हैं। इस विस्तारित व्यवस्था के केंद्र में भारत है, जो समूह की स्थापना के बाद 2026 में चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है।
समावेशी वैश्विक व्यवस्था का महत्वपूर्ण मंच
BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय और ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। निरंतर संवाद के जरिए यह बहुपक्षीय संस्थाओं में ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बना है। BRICS का एजेंडा विकास, वित्त, प्रौद्योगिकी, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे व्यापक क्षेत्रों तक फैला है। यह समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और उनकी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है तथा सदस्य देशों को अनुभव साझा करने और साझा चुनौतियों के समाधान तलाशने का मंच देता है।
2026 में भारत की चौथी अध्यक्षता
भारत 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। वर्ष 2026 में यह समूह की अध्यक्षता करने का भारत का चौथा अवसर है। भारत की अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” है। यह थीम उपलब्धियों को मजबूत करने, संस्थागत प्रभावशीलता बढ़ाने तथा विकास, स्थिरता और नवाचार को BRICS के एजेंडे के केंद्र में रखने पर जोर देती है। इसके साथ ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। भारत का उद्देश्य BRICS को रचनात्मक, समाधान-केंद्रित और परिणामोन्मुख मंच के रूप में और अधिक मजबूत करना है।
11 देशों का व्यापक समूह
वर्तमान में BRICS में 11 देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—शामिल हैं। सामूहिक रूप से ये देश दुनिया की करीब 49.5% आबादी, वैश्विक GDP के करीब 40% और विश्व व्यापार के लगभग 26% का प्रतिनिधित्व करते हैं। समूह के विस्तार से इसकी भौगोलिक पहुंच एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक बढ़ी है। इससे बड़े बाजारों, प्राकृतिक संसाधनों, तकनीकी क्षमताओं और अलग-अलग विकास अनुभवों को एक साझा मंच पर लाने का अवसर मिला है।
‘BRIC’ नाम की शुरुआत
‘BRIC’ संक्षिप्त नाम वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल इकोनॉमिक्स पेपर ‘The World Needs Better Economic BRICs’ में गढ़ा गया था। इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को ऐसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में चिन्हित किया गया था, जिनके आने वाले दशकों में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की संभावना थी। बाद में यह अवधारणा एक औपचारिक समूह में बदल गई। वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद BRIC का विस्तार होकर BRICS हुआ। इसके साथ समूह ने आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक सहयोग के व्यापक मंच का रूप लेना शुरू किया।
लोकतांत्रिक और संतुलित वैश्विक व्यवस्था का लक्ष्य
BRICS की शुरुआती अवधारणा अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर संवाद के लिए एक मंच के रूप में विकसित हुई। इसका उद्देश्य अधिक लोकतांत्रिक, वैध और संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना था। समूह ने सतत आर्थिक एवं सामाजिक विकास, सामाजिक समावेशन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझा समृद्धि पर भी जोर दिया। समय के साथ ये प्राथमिकताएं सदस्य देशों के बीच व्यापक सहयोग की नींव बनीं।
सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा
BRICS शिखर सम्मेलनों के जरिए सहयोग रणनीतिक वैश्विक मुद्दों और व्यावहारिक क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, अंतरराष्ट्रीय वित्त और वैश्विक आर्थिक स्थिति इसके प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे हैं। BRICS विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और समानता का समर्थन करता है। इन प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रभावी और मौजूदा चुनौतियों के प्रति उत्तरदायी बनाना है।
2008 का संकट बना अहम मोड़
2008 का वैश्विक वित्तीय संकट BRICS के विकासक्रम में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस संकट ने मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया और वैश्विक आर्थिक शासन में व्यापक सुधार की जरूरत को सामने रखा। BRIC देशों ने अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रभावी भागीदारी और आवाज की मांग की। साथ ही, संरक्षणवाद का विरोध करते हुए खुले और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार तंत्र का समर्थन किया। इन साझा प्रयासों ने 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहले BRIC शिखर सम्मेलन की नींव तैयार की।
2010 के बाद BRICS का विस्तार
BRIC की औपचारिक स्थापना 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के बीच राजनीतिक सहयोग के मंच के रूप में हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के बाद समूह का विस्तार हुआ और BRICS बना। इसके बाद समूह का एजेंडा विकास, वित्त, स्वास्थ्य, जलवायु कार्रवाई, प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों तक फैल गया। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और संवाद के लिए BRICS एक व्यापक मंच के रूप में स्थापित हुआ।
2024 और 2025 में तेजी से बढ़ी सदस्यता
BRICS के विस्तार का महत्वपूर्ण चरण जनवरी 2024 में शुरू हुआ, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वें पूर्ण सदस्य के रूप में समूह में शामिल हुआ। विस्तार के साथ ‘पार्टनर कंट्री’ की नई श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे में शामिल हुए।
पार्टनर कंट्री व्यवस्था से बढ़ी पहुंच
पार्टनर कंट्री फ्रेमवर्क BRICS की पूर्ण सदस्यता संरचना में बदलाव किए बिना समूह के दायरे को व्यापक बनाता है। इससे एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया में साउथ-साउथ सहयोग के अवसर मजबूत हुए हैं। व्यापार, वित्त, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं बनी हैं। यह व्यवस्था उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े विमर्श में बढ़ती रुचि को भी दर्शाती है।
अध्यक्षता की क्रमिक व्यवस्था
BRICS की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है और अध्यक्षता करने वाला देश उस वर्ष की प्राथमिकताएं तय करता है। वह वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के साथ प्रमुख मंत्रिस्तरीय और कार्य समूहों की बैठकों का संचालन करता है। सदस्य देशों की संख्या बढ़ने के बाद अध्यक्षता की नई क्रमिक व्यवस्था पर भी चर्चा हो रही है।
2012: सशक्त सहयोग की नींव
भारत ने 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में चौथे BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इसकी थीम “वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए BRICS साझेदारी” थी। सम्मेलन में ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार, सतत विकास, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दिल्ली घोषणा-पत्र और BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए कार्ययोजना को अपनाया गया।
2012 के प्रमुख परिणाम
शिखर सम्मेलन में इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने हेतु नए विकास बैंक की स्थापना की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव रखा गया। सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा से संबंधित मास्टर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। इससे BRICS देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया गया। कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) की नींव भी रखी गई, जिसका उद्देश्य अल्पकालिक लिक्विडिटी सहायता देना और वित्तीय अस्थिरता से निपटने में सदस्य देशों की मदद करना था। भारत ने कृषि, स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग के लिए नए संयुक्त कार्य-तंत्रों को संस्थागत रूप देने में भी भूमिका निभाई।
2016: गोवा से सहयोग का विस्तार
भारत ने अक्टूबर 2016 में गोवा में आठवें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इसकी थीम “उत्तरदायी, समावेशी और सामूहिक समाधान का निर्माण” थी। इस दौरान आतंकवाद-रोधी प्रयासों, व्यापार, नवाचार और बहुपक्षीय समन्वय के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया। गोवा शिखर सम्मेलन ने व्यावहारिक सहयोग और उभरती वैश्विक चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने की प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
2016 के प्रमुख परिणाम
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के संचालन को शुरुआती वित्तीय ऋणों के जरिए मजबूत किया गया, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को प्रमुखता दी गई। BRICS ने नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और ऊर्जा सुरक्षा को साझा प्राथमिकताओं में शामिल किया। HIV और तपेदिक से निपटने के प्रयासों पर भी ध्यान बढ़ाया गया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ BRICS की प्रतिबद्धता को मजबूत किया और FATF मानकों के पालन पर जोर दिया। BRICS-बिम्सटेक आउटरीच शिखर सम्मेलन के जरिए आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यावरण, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में संवाद को व्यापक बनाया गया। इसके अलावा BRICS कृषि अनुसंधान मंच, रेलवे अनुसंधान नेटवर्क, खेल परिषद और युवाओं से जुड़े सहयोग मंचों की स्थापना की दिशा में समझौते किए गए।
2021: सहमति और निरंतरता पर जोर
भारत ने 9 सितंबर 2021 को 13वें BRICS शिखर सम्मेलन की वर्चुअल माध्यम से मेजबानी की। BRICS की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन की थीम “BRICS@15: निरंतरता, मजबूती और सहमति के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग” थी। भारत ने संस्थागत निरंतरता, सहयोग को गहरा करने और व्यापक सहमति बनाने पर जोर दिया। स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ाया गया।
2021 के प्रमुख परिणाम
भारत ने संयुक्त BRICS आतंकवाद-रोधी कार्ययोजना को अपनाने की प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। पहली बार BRICS डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी भारत ने की। BRICS वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया गया। साथ ही, BRICS रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के लिए सहयोग समझौते पर सहमति बनी, जिससे पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और जलवायु निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग डेटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत हुई। भारत ने ग्रीन टूरिज्म के लिए BRICS अलायंस और सतत संसाधन प्रबंधन के लिए पहली BRICS जल मंत्रियों की बैठक जैसी नई पहलों को भी आगे बढ़ाया।
2026: 350 से अधिक बैठकों से सहयोग को गति
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता ग्रहण की। अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय सहभागिताएं आयोजित की गईं। इन बैठकों में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क के तीन प्रमुख स्तंभों के तहत सहयोग को आगे बढ़ाया गया।
कृषि में सहयोग और तकनीक पर जोर
BRICS कृषि उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए प्राकृतिक, जैविक और पुनर्स्थापनात्मक कृषि पद्धतियों पर संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता विकास पर सहमति बनी। इसके प्रारंभिक समन्वय की जिम्मेदारी ICAR-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम को दी गई। डिजिटल कृषि पर BRICS नेटवर्क के जरिए AI आधारित निर्णय-सहायता प्रणालियों, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, IoT आधारित निगरानी और उन्नत डेटा विश्लेषण के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी सहयोग आगे बढ़ाया गया। इसका प्रारंभिक समन्वय IIT दिल्ली करेगा। BRICS AGRIN को बीज, जर्मप्लाज्म और कृषि इनपुट के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने के लिए स्वैच्छिक और किसान-केंद्रित ढांचे के रूप में स्थापित करने पर सहमति बनी।
स्वस्थ जीवनशैली और पारंपरिक चिकित्सा
स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए BRICS रोडमैप 2026-2029 शुरू किया गया। इसका उद्देश्य तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और समन्वित जागरूकता पहलों के जरिए मोटापे और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को बढ़ावा देना है। पारंपरिक, सहायक एवं एकीकृत चिकित्सा पर BRICS विशेषज्ञ कार्य समूह बनाने पर भी सहमति बनी। इसके तहत नीतिगत संवाद, अनुसंधान, क्षमता विकास, शैक्षणिक आदान-प्रदान, डिजिटल ज्ञान मंच और गुणवत्ता एवं नियामक मानकों पर सहयोग किया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य पर सहयोग
BRICS प्रशिक्षण हब नेटवर्क और उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान बढ़ाया गया है। भारत के NIMHANS को इस पहल के समन्वय केंद्र के रूप में नामित किया गया है। इसका उद्देश्य कौशल उन्नयन, मानकीकृत प्रशिक्षण और क्षमता विकास के जरिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपलब्ध मानव संसाधन को मजबूत करना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना है।
सतत जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान
BRICS के सिद्धांतों के अनुरूप पारंपरिक ज्ञान को मुख्यधारा से जोड़ने और जलवायु चुनौतियों से निपटने में समुदाय आधारित समाधानों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। BRICS संस्थानों के नेटवर्क के जरिए सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने, क्षमता विकास कार्यशालाएं आयोजित करने और विभिन्न देशों की उत्कृष्ट कार्य-पद्धतियों को साझा करने की दिशा में भी पहल की गई है।
कौशल विकास और रोजगार पर फोकस
BRICS Connect के तहत क्षमता विकास, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, कौशल एवं रोजगार-योग्यता तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया गया है। यह सहयोग स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड पर सहयोग
ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड पर BRICS मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाया गया है। साथ ही स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए BRICS डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत की गई। यह मंच सदस्य देशों के बीच ज्ञान साझा करने, क्षमता विकास, नीतिगत एवं नियामकीय सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान और प्रायोगिक पहलों को बढ़ावा देगा।
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा
सतत शहरी मोबिलिटी में ज्ञान साझा करने और तकनीकी सहयोग के लिए BRICS Urban Mobility Hub की स्थापना की गई है। जलवायु और आपदा जोखिम को शहरी नियोजन, डिजाइन, निवेश, निर्माण और रखरखाव में शामिल करने के लिए जलवायु-लचीले शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्वैच्छिक सिद्धांत भी अपनाए गए हैं। BRICS Urban Research and Knowledge Network की स्थापना से व्यावहारिक शहरी अनुसंधान, देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
MSME और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा
BRICS MSME Cooperation Portal को सदस्य देशों के MSME, टेक्नोलॉजी सेंटर, क्लस्टर, व्यापार संघों, वित्तीय संस्थानों, प्रशिक्षण संस्थानों और नीति-निर्माताओं को जोड़ने वाले डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। MSME फाइनेंस पर संस्थागत संवाद और अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए वर्कप्लान के जरिए बाजार और वित्त तक पहुंच बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। BRICS Incubator Network के जरिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसियों, चुने हुए इन्क्यूबेटरों और स्टार्टअप्स को जोड़ने का प्रयास किया गया है। वहीं BRICS Startup Innovation Fund का उद्देश्य शुरुआती और विकास चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देना और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
विज्ञान और वैश्विक वैल्यू चेन पर सहयोग
BRICS Science and Research Repository को वैज्ञानिक ज्ञान के संरक्षण और साझा करने के लिए संरचित मंच के रूप में आगे बढ़ाया गया है। वैश्विक वैल्यू चेन के क्षेत्र में BRICS GVC Action Plan 2026-2030 के जरिए बाजार खोलने, आर्थिक विविधीकरण और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत एवं कुशल बनाने पर सहयोग की सहमति बनी है। इसके तहत तकनीकी परिषद और संयुक्त अध्ययन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
सीमा शुल्क और व्यापार सुगमता
सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और परस्पर प्रशासनिक सहायता से जुड़े BRICS समझौते को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य व्यापार को गति देना, लेन-देन की लागत कम करना, सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है। इसके साथ अवैध व्यापार पर रोक लगाने पर भी जोर दिया गया है।
मानकीकरण और तकनीकी सहयोग
BRICS के राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रमुखों द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इससे मानकों के विकास, उन्हें अपनाने और लागू करने में तालमेल बढ़ाने, सूचना एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों को साझा करने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
युवाओं और खेल तकनीक पर नई पहल
BRICS Youth Cooperation Framework 2026 को युवा संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक पहलों के लिए संदर्भ दस्तावेज के रूप में अपनाया गया है। इसका उद्देश्य युवा क्षेत्र में निरंतरता और व्यवस्थित सहयोग को मजबूत करना है। खेल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत बनाने के लिए नया कार्य समूह गठित किया गया है। इसका उद्देश्य सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों, तकनीकी सूचनाओं और अनुसंधान से जुड़े इनपुट के आदान-प्रदान के जरिए सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत की अध्यक्षता का व्यापक उद्देश्य
2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया आर्थिक असंतुलन, तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी परस्पर जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में BRICS संवाद और समन्वित कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है। समूह के बढ़ते सदस्य देशों के जरिए विकास, जलवायु कार्रवाई, तकनीक, ऊर्जा और वित्तीय मजबूती जैसे क्षेत्रों में विविध दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
विस्तार से आगे, परिणामों पर भारत का जोर
भारत के लिए BRICS का उद्देश्य केवल समूह का आकार और दायरा बढ़ाना नहीं है। लक्ष्य बढ़ती सदस्यता को सार्थक सहयोग और ठोस परिणामों में बदलना है। भारत की अध्यक्षता विविध सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने, मौजूदा संस्थागत व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रखने पर केंद्रित है। भारत का प्रयास BRICS को एक अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में रचनात्मक शक्ति के रूप में मजबूत करने का है। पिछले वर्षों में उसकी लगातार अध्यक्षताओं से मिले अनुभव और 2026 की विस्तारित सदस्यता संरचना के साथ यह समूह सहयोग, विकास और वैश्विक शासन के नए चरण की ओर बढ़ रहा है।