नई दिल्ली, 26 अगस्त 2025 : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के आवास पर बड़ी छापेमारी की। यह कार्रवाई दिल्ली सरकार के अस्पताल निर्माण घोटाले के मामले में की जा रही है, जिसमें कथित तौर पर 5,590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मामले पर ट्वीट किया है।
CM मान का ट्वीट
भगवंत मान ने ट्वीट करते हुए कहा, "आज सौरभ भारद्वाज पर रेड की गई, क्योंकि कल से पूरे देश में मोदी जी की डिग्री को लेकर चर्चा है कि मोदी जी की डिग्री फर्जी है। ये रेड उस से ध्यान भटकाने के लिए की गई है। सत्येंद्र जैन जी को भी तीन साल जेल में रखा, और बाद में CBI और ED ने कोर्ट में क्लोज़र रिपोर्ट फाइल की। इस से साफ़ है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं पर किया गए सारे केस फर्ज़ी और झूठे है।"
ਅੱਜ ਸੌਰਭ ਭਾਰਦਵਾਜ 'ਤੇ ਰੇਡ ਕੀਤੀ ਗਈ, ਕਿਉਂਕਿ ਕੱਲ੍ਹ ਤੋਂ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਮੋਦੀ ਜੀ ਦੀ ਡਿਗਰੀ ਨੂੰ ਲੈ ਚਰਚਾ ਹੈ ਕਿ ਮੋਦੀ ਜੀ ਦੀ ਡਿਗਰੀ ਫ਼ਰਜ਼ੀ ਹੈ। ਇਹ ਰੇਡ ਸਿਰਫ਼ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਤੋਂ ਧਿਆਨ ਭਟਕਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ।
ਸਤੇਂਦਰ ਜੈਨ ਜੀ ਨੂੰ ਵੀ ਝੂਠੇ ਕੇਸ 'ਚ ਤਿੰਨ ਸਾਲ ਜੇਲ੍ਹ ਵਿੱਚ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ, ਤੇ ਬਾਅਦ 'ਚ CBI ਤੇ ED ਨੇ ਅਦਾਲਤ…
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) August 26, 2025
अस्पताल निर्माण घोटाले की पूरी जानकारी
2018-19 में दिल्ली सरकार ने 24 अस्पतालों के निर्माण के लिए प्रोजेक्ट मंजूर किए थे, जिन्हें छह महीने के अंदर पूरा करना था कि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो सके। लेकिन तीन वर्षों के बाद भी अधिकांश अस्पताल अधूरे हैं, जबकि करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं। LNJP अस्पताल की लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ हुई, लेकिन कार्य प्रगति धीमी है। जांच में यह भी पाया गया कि कई जगह बिना अनुमति के निर्माण कार्य हुए और ठेकेदारों की भूमिका भी संदिग्ध है। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) 2016 से लंबित है।
आरोप और राजनीतिक विवाद
ईडी और ACB ने इस मामले में सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच शुरू की है। सत्येंद्र जैन को पहले भी तीन साल जेल में रखा गया था, बाद में मामला बंद हो गया था।
AAP नेताओं का कहना है कि यह पूरा मामला झूठा और राजनीति से प्रेरित है। आतिशी और अनुराग धांडा ने इस कार्रवाई को प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि जिस समय आरोपी थे, उस समय वे मंत्री नहीं थे, इसलिए केस बिना आधार के है।